कोलकाता:पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में इस समय सबसे बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। मई 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की कमान संभाल ली है। इस ऐतिहासिक हार के बाद से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखर रही है और पार्टी के भीतर अब तक की सबसे बड़ी बगावत खड़ी हो गई है।इस राजनीतिक संकट की शुरुआत तब हुई जब निष्कासित नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में TMC के 59 बागी विधायकों ने पाला बदल लिया।
इन विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस को पत्र सौंपकर विधायी दल पर अपना दावा ठोक दिया, जिसके बाद स्पीकर ने रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नए नेता (LoP) के रूप में मान्यता दे दी। यह घटना ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर और उनके नेतृत्व पर सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है। इस बगावत के बाद कोलकाता के मेयर और ममता के बेहद करीबी नेता फिरहाद हकीम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए TMC ने अपनी सभी राज्य-स्तरीय संगठनात्मक कमेटियों को भंग कर दिया है। इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिक्षक भर्ती घोटाले में अभिषेक बनर्जी को 15 जून के लिए नया समन जारी किया है।
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही कड़े प्रशासनिक और सांस्कृतिक फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए राज्य के सभी स्कूलों और मदरसों की सुबह की प्रार्थना में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस फैसले पर राज्य में नया वैचारिक विवाद छिड़ गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस आदेश का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत वापस लेने या मुस्लिम छात्रों को इससे छूट देने की मांग की है।अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कैबिनेट का बड़ा विस्तार भी किया है।
राजभवन में राज्यपाल आर. एन. रवि ने 35 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, जिससे अब राज्य मंत्रिमंडल में मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो गई है।इस बीच, चुनाव में केवल 80 सीटों पर सिमटने वाली ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने चुनावी नतीजों को एक बड़ी “साजिश” और 177 सीटों पर “काउंटिंग में धांधली” का नतीजा बताया है। अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों के विरोध में उन्होंने कोलकाता के एस्प्लेनेड में एक दिवसीय धरना भी दिया। फिलहाल, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राज्य की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं ताकि बंगाल की हिंसक राजनीति पर लगाम लगाई जा सके।