नई दिल्ली: नई दिल्ली के शिविर सेंटर में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन में 10 अगस्त 2026 को देशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन करने का बड़ा फैसला लिया गया है।
इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर के 500 से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत किसान और छात्र आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की गई। किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि दिसंबर 2021 में हुए लिखित समझौते (जैसे एमएसपी की कानूनी गारंटी, केस वापसी और कर्ज माफी) को अभी तक लागू नहीं किया गया है।
प्रमुख मुद्दे और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध
अधिवेशन का मुख्य दस्तावेज पेश करते हुए ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कॉमरेड कृष्ण प्रसाद ने नीतियों की तीखी आलोचना की। नेताओं ने चेतावनी दी कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय किसानों के लिए ‘मरणघंटी’ साबित होगा। इससे भारतीय बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल जाएंगे, जिसे नेताओं ने संप्रभुता के साथ समझौता बताया। इसके अलावा, बिजली बिल, बीज विधेयक और मनरेगा में कटौती को लेकर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया।
आगामी आंदोलनों की रूपरेखा:
किसान मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का एलान किया है:
* 10 अगस्त: देश के 1,000 स्थानों पर ‘जेल भरो’ आंदोलन।
* 17 अगस्त: प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, मंत्रियों और सांसदों को ज्ञापन सौंपना।
* 3 अक्टूबर: लखीमपुर खीरी शहीद दिवस पर हर गांव में ‘किसान पंचायत’ का आयोजन।
* 26 नवंबर: किसान आंदोलन की छठी वर्षगांठ पर देशव्यापी बड़े आंदोलन की शुरुआत।
इस अधिवेशन को कॉमरेड अशोक धवले, राकेश टिकैत, बीजू कृष्णन, डॉ. सुनीलम और जोगिंदर सिंह उग्राहा सहित झारखंड और बिहार के कई वरिष्ठ किसान नेताओं ने संबोधित किया।
