Ranchi: आज झारखंड के विभिन्न जन संगठनों व मंचों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर SIR के एन्युमरेशन फेज तक की जमीनी स्थिति के आधार पर निम्न मुद्दों व मांगों को साझा किया है। आयोग को यह भी याद दिलाया है कि राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के अनुसार 2026 में झारखंड की अनुमानित वयस्क आबादी 2.78 करोड़ है। संगठनों ने मांग किया है कि SIR में किसी भी नागरिक का नाम न कटे और राज्य की सम्पूर्ण वर्तमान वयस्क आबादी मतदाता सूची में दर्ज हो।
1. ASD सूची
आयोग द्वारा निर्गत की गई जानकारी अनुसार राज्य में निम्बन्धित कुल 2.64 करोड़ मतदाताओं में 43 लाख मतदाता ASD सूची में हैं। इसमें 14.55 लाख लोग ऐसे चिन्हित हुए हैं जो मिले नहीं एवं 1.17 लाख को “अन्य” की श्रेणी में रखा गया है। इसमें अनेक झारखंडी प्रवासी मजदूर हैं जो अपना फॉर्म जमा नहीं कर पाए इन्हें ASD सूची में रखकर डिलीट करना बिल्कुल गलत होगा। यह मांग की गई है कि 5 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची के साथ-साथ ASD सूची को भी सार्वजनिक किया जाए ताकि लोग सत्यापन कर सकें।
2. तार्किक विसंगति सूची
संगठनों ने राज्य के अनेक बूथों का अवलोकन किया और यह पाया कि BLO ऐप में “view logical discrepancy” रिपोर्ट में सैकड़ों मतदाताओं के नाम हैं। आयोग द्वारा 20 जुलाई 2026 को निर्गत प्रेस वक्तव्य के अनुसार तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा एवं उन्हे दस्तावेज़ दिखने होंगे। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि तार्किक विसंगति के लिए क्या-क्या दस्तावेज़ देने होंगे। झारखंड में आदिवासी, दलित व अन्य वंचित समुदायों के विभिन्न दस्तावेज़ों में दर्ज जानकारी खास कर के नाम के स्पेलिंग व उम्र में अनेक त्रुटियाँ हैं। ऐसी परिस्थिति में राज्य में लाखों आदिवासी-मूलवासी तार्किक विसंगति के नोटिस के कारण परेशान होंगे। इसलिए तार्किक विसंगति की प्रक्रिया को निरस्त करना चाहिए। यह मांग किए गए हैं कि चुनाव आयोग 5 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची के साथ-साथ तार्किक विसंगति की सूची भी सार्वजनिक करे। साथ ही, आयोग यह स्पष्ट बताए कि तार्किक विसंगति में दर्ज मतदाताओं के लिए विसंगति सुधार की क्या प्रक्रिया होगी।
3. सूची सत्यापन के लिए ग्राम सभा आयोजन
आयोग ने कहा है कि 15 अगस्त को पूरे राज्य में विशेष ग्राम सभा का आयोजन होगा जिसमें ड्राफ्ट मतदाता सूची को पढ़ा जाएगा व आपत्तियों को दर्ज किया जाएगा। झारखंड सरकार द्वारा जारी PESA नियमावली में यह स्पष्ट उल्लेखित है कि ग्राम सभा केवल गाँव स्तर पर पारंपरिक प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित हो सकता है। एक बूथ में कई गाँव सम्मिलित होते हैं। इसलिए बूथ स्तर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन नहीं हो सकता है। यह भी गौर करने की बात है कि एक ही दिन हर गाँव में ग्राम सभा का आयोजन नहीं हो सकता है। यह मांग की गई है कि ग्राम सभाओं द्वारा सत्यापन के लिए दो सप्ताह दिया जाए जिस दौरान हर गाँव अपने सहूलियत अनुसार तिथि तय कर ग्राम सभा करेगा।
यह पत्र झारखंड जनाधिकार महासभा, यूनाइटेड मिली फोरम, साझा कदम, एपीसीआर, भारत जोड़ो अभियान, लोकतान्त्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान की ओर से संयुक्त रूप से भेज गया है।