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जेएसएससी और जेपीएससी में भ्रष्टाचार: सोरेन सरकार की नाकामी और विरोध को कुचलने की राजनीति

झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) और झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की परीक्षाओं में लगातार होते पेपर लीक और धांधली ने राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। हेमंत सोरेन और उनकी सरकार भ्रष्टाचार के इस दीमक को खत्म करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले मुख्यमंत्री आज युवाओं के आक्रोश के घेरे में हैं।

भ्रष्टाचार पर नियंत्रण खोती सरकार

कहा जा रहा था कि नई नीतियां युवाओं को रोजगार देंगी, लेकिन असलियत में जेएसएससी और जेपीएससी भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। समय पर परीक्षा न होना, परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक हो जाना और जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करना सोरेन सरकार की प्रशासनिक कमजोरी को उजागर करता है। परीक्षाओं की पारदर्शिता खत्म हो चुकी है, जिससे योग्य छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सरकार की यह नाकामी केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि राज्य के युवाओं के साथ एक बड़ा विश्वासघात है।

विरोध को कुचलने का अलोकतांत्रिक प्रयास

इस नाकामी से भी ज्यादा शर्मनाक बात सरकार और उनकी पार्टी (झामुमो) का वह रवैया है, जिसके तहत युवाओं की आवाज को दबाया जा रहा है। हाल ही में अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे आक्रोशित छात्रों और प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला तक जलाने से रोका गया। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सोरेन सरकार ने इस अधिकार को कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए एफआईआर की राजनीतिसत्ता के अहंकार का सबसे बुरा रूप तब देखने को मिला जब प्रदर्शनकारी छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं का सहारा लिया गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ थानों में एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं। यह सीधे तौर पर डराने-धमकाने की राजनीति है। जब सरकार कानून और व्यवस्था का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों और कमियों को छिपाने के लिए करने लगे, तो लोकतंत्र का दम घुटने लगता है।

निष्कर्ष

हेमंत सोरेन को यह समझना होगा कि मुकदमों और लाठियों के दम पर युवाओं के भविष्य की बर्बादी पर उठने वाले सवालों को दबाया नहीं जा सकता। भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने और विरोध प्रदर्शनों को सत्ता के बल पर रोकने की यह कोशिश सोरेन सरकार के पतन का कारण बन सकती है। युवाओं को न्याय चाहिए, दमन नहीं।

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