बिरनी (गिरिडीह) में SIR में अनमैपिंग से सैकड़ों वोटर परेशान, राज्य और केंद्र सरकार पहल करे – राजेश कुमार
बिरनी, गिरिडीह: गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड में इन दिनों SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अनमैपिंग की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। बिरनी के दर्जनों गांवों में लोगों के घर का लोकेशन मैप पर नहीं दिख रहा है, जिससे उनका नाम वोटर लिस्ट में या तो गलत जगह जुड़ रहा है या कट रहा है। इस मुद्दे को लेकर बिरनी के सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से तत्काल पहल करने की मांग की है।
राजेश कुमार ने बताया कि बिरनी प्रखंड में 28 पंचायतें और 181 गांव हैं। पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्र होने के कारण यहां पहले से ही नेटवर्क और जीपीएस की समस्या रहती है। SIR के दौरान जब BLO घर-घर वेरिफिकेशन के लिए जा रहे हैं तो मोबाइल ऐप में कई घर अनमैप्ड (Unmapped) दिखा रहे हैं।
“बिरनी बाजार, बरमसिया, केन्दुआ बराकरकला, खेदवारा जैसे गांवों में 300 से ज्यादा लोगों की शिकायत मिली है। किसी का घर बरमसिया में है लेकिन मैप में वो बिरनी पंचायत में दिख रहा है। किसी का बूथ 2 किलोमीटर दूर दिखा रहा है। इससे मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी हो रही है,” राजेश कुमार ने कहा।
उन्होंने कहा कि अनमैपिंग की वजह से सिर्फ वोटर लिस्ट ही नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है।
क्या-क्या दिक्कत हो रही है?
1. वोटर लिस्ट से नाम गायब: अनमैपिंग के कारण BLO रिपोर्ट में घर Not Found दिखा रहा है, तो नाम डिलीट होने की कगार पर है।
2. राशन और पेंशन में बाधा: कई लोगों का राशन कार्ड बिरनी में है, लेकिन आधार में लोकेशन बगोदर दिख रहा है। वेरिफिकेशन में अनमैप्ड बताकर पेंशन रोकी जा रही है।
3. युवाओं में नाराजगी: पहली बार वोट देने वाले युवाओं के नाम अनमैपिंग के कारण नहीं जुड़ पा रहे हैं।
सरकार से क्या मांग है?
राजेश कुमार ने दो स्तरों पर मांग रखी है।
राज्य सरकार से मांग: झारखंड सरकार के चुनाव विभाग और गिरिडीह उपायुक्त को चाहिए कि बिरनी प्रखंड के लिए अलग से विशेष कैंप लगाया जाए। राजस्व कर्मचारी, पंचायत सेवक और BLO एक साथ बैठकर अनमैप्ड घरों को मैन्युअल रूप से वेरिफाई करें। 2003 से पहले के खतियान और पुराने वोटर लिस्ट के आधार पर मैपिंग को सुधारा जाए।
केंद्र सरकार से मांग: केंद्र सरकार की एजेंसी NIC और भारतीय चुनाव आयोग को बिरनी जैसे पिछड़े प्रखंडों के लिए सैटेलाइट मैप को अपडेट करना चाहिए। केंद्र को एक ऐसा पोर्टल बनाना चाहिए जहां ग्रामीण खुद अपने घर का फोटो और जीपीएस लोकेशन अपलोड करके मैपिंग ठीक कर सकें।
राजेश कुमार ने कहा, “बिरनी गिरिडीह का सीमावर्ती प्रखंड है, यहां गरीबी ज्यादा है। अगर वोटर लिस्ट से ही नाम कट जाएगा तो लोग लोकतंत्र से दूर हो जाएंगे। मेरा निवेदन है कि राज्य सरकार के मुख्य सचिव और केंद्र के चुनाव आयोग इस पर तुरंत संज्ञान लें।”