Ranchi: स्वतंत्रता संग्राम के उन वीर नायकों को याद करना, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसी उद्देश्य के साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) में शहीद बाजी राउत की जन्मशती के अवसर पर दो दिवसीय *‘नेशनल यूथ कॉन्क्लेव इन द लेगेसी ऑफ शहीद बाजी राउत–इंस्पायरिंग यूथ फॉर नेशन बिल्डिंग’* का आयोजन किया गया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) और ओडिया रिसर्च सेंटर के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शहीद बाजी राउत के जीवन, संघर्ष, अदम्य साहस, त्याग और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान से परिचित कराया गया।
दो दिवसीय आयोजन के दौरान अकादमिक गतिविधियों के साथ विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल बाजी राउत के जीवन और बलिदान को समझा, बल्कि उनके व्यक्तित्व और संघर्ष को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से समाज तक पहुंचाने का प्रयास भी किया।
निबंध प्रतियोगिता में 23 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में *‘बाजी राउत : द अनसंग हीरो’* विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गयी। प्रतियोगिता में शिक्षा, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, अंग्रेजी अध्ययन तथा राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के कुल 23 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आयोजित की गयी।
विद्यार्थियों ने अपने निबंधों में बाजी राउत के जीवन, उनके संघर्ष, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका और देश के प्रति उनके समर्पण को अलग-अलग दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया। कम उम्र में देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले बाजी राउत के साहस और त्याग को विद्यार्थियों ने वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
पोस्टरों में उभरा साहस और बलिदान
इसी दिन पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी। इसमें विद्यार्थियों ने चित्रों, रंगों और संदेशों के माध्यम से शहीद बाजी राउत के जीवन और संघर्ष को अभिव्यक्त किया। चार-चार विद्यार्थियों के समूह में आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल 25 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
प्रतियोगिता के दौरान तैयार किये गये पोस्टरों को विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में प्रदर्शित किया गया। पोस्टरों में बाजी राउत के साहस, राष्ट्रप्रेम, संघर्ष और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और स्वतंत्रता आंदोलन के अपेक्षाकृत कम चर्चित नायकों को याद करने का संदेश दिया।
‘बाजी राउत ऐज ए मोटिवेटर’ पर विद्यार्थियों ने दी प्रस्तुति
30 सितंबर को *‘Baji Rout as a Motivator’* विषय पर छात्र प्रस्तुति प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इसमें विद्यार्थियों ने बाजी राउत के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों, उनके साहस और देश के प्रति समर्पण को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखा। प्रत्येक प्रतिभागी को प्रस्तुति के लिए 10 मिनट का समय दिया गया। प्रतियोगिता के लिए कुल 10 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था।
प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने इस बात को रेखांकित किया कि कम उम्र में भी बाजी राउत ने जिस असाधारण साहस का परिचय दिया, वह आज के युवाओं को कर्तव्य, साहस और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है।
अनसंग नायकों को इतिहास में उचित स्थान देने पर जोर
सम्मेलन के समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सारंग मेधाकर, युवा सम्मेलन के नोडल अधिकारी प्रो. कुंज बिहारी पांडा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. बी. बी. मिश्रा, वित्त अधिकारी पी. के. पांडा और प्रो. तपन कुमार बसंतिया सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद बाजी राउत को पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
कुलपति प्रो. सारंग मेधाकर ने अपने संबोधन में कहा कि देश के ऐसे महान व्यक्तित्वों को जानना और याद रखना आवश्यक है, जिनके योगदान को इतिहास की मुख्यधारा में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम केवल कुछ प्रसिद्ध नेताओं और घटनाओं तक सीमित नहीं है। इसके पीछे हजारों ऐसे लोगों का संघर्ष और बलिदान रहा है, जिन्होंने बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अनसंग नायकों के जीवन और संघर्ष को नई पीढ़ी के सामने लाना इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि युवा देश के इतिहास को व्यापक दृष्टिकोण से समझ सकें और उन महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा ले सकें।
जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान
इस अवसर पर डॉ. आलोक कुमार गुप्ता ने देशभक्ति और जिम्मेदार नागरिकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने तथा सकारात्मक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही एक मजबूत और जिम्मेदार समाज का निर्माण संभव है।
प्रो. तपन कुमार बसंतिया ने भी भारतीय इतिहास के महान नायकों के जीवन और उनके प्रेरणादायी योगदान पर विचार साझा किये। उन्होंने विद्यार्थियों को इतिहास के विभिन्न पक्षों को समझने और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले कम चर्चित नायकों के बारे में अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों ने तैयार की शहीद बाजी राउत पर डॉक्यूमेंट्री
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण आकर्षण सीयूजे के विद्यार्थियों द्वारा शहीद बाजी राउत के जीवन और विरासत पर तैयार की गयी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन रहा। विद्यार्थियों ने शोध और रचनात्मक प्रयासों के माध्यम से बाजी राउत के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों, उनके साहस, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दृश्य माध्यम से प्रस्तुत किया।
डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि इतिहास के पन्नों में दर्ज ऐसे अनेक नायक हैं, जिनके योगदान को व्यापक स्तर पर याद किये जाने की आवश्यकता है। डॉक्यूमेंट्री को उपस्थित लोगों ने सराहा और विद्यार्थियों के प्रयास की प्रशंसा की।
विजेता विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
समापन समारोह के अवसर पर निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण तथा डिजिटल एवं सोशल मीडिया अभियान की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र, पुस्तक और पेन देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर विद्यार्थियों में उत्साह देखा गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मुकेश कुमार जायसवाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ शहीद बाजी राउत की जन्मशती को समर्पित दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का समापन हुआ।