रांची: बच्चों में एकाग्रता, स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास, स्पष्ट उच्चारण एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित ‘श्रुतिधारा’ – श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक एवं अर्थ वाचन प्रतियोगिता का सफल आयोजन रविवार, 26 जुलाई 2026 को गुरु नानक हायर सेकेंडरी स्कूल, मेन रोड, रांची में संपन्न हुआ।
प्रतियोगिता में 130 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों को आयु के आधार पर तीन वर्गों—कान्हा (5–8 वर्ष), माधव (9–12 वर्ष) एवं केशव (13–16 वर्ष)—में विभाजित किया गया था। प्रथम चरण में प्रत्येक प्रतिभागी ने निर्धारित श्लोक का वाचन किया, जिसके आधार पर प्रत्येक वर्ग से 10-10 प्रतिभागियों का चयन करते हुए कुल 30 प्रतिभागियों ने अंतिम चरण में स्थान बनाया। अंतिम चरण में प्रतिभागियों ने दो श्लोकों का वाचन एवं निर्धारित अनुसार अर्थ प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का मूल्यांकन शुद्ध उच्चारण, स्पष्ट प्रस्तुति, आत्मविश्वास, मंच संचालन क्षमता तथा श्लोक के अर्थ की समझ के आधार पर किया गया। निर्णायक मंडल में श्री धीरेंद्र कुमार, श्री विद्यानिधि पाण्डेय एवं श्रीमती हरप्रीत कौर ने निष्पक्ष एवं सूक्ष्म मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रांची नगर निगम की महापौर श्रीमती रोशनी खलखो ने विजेता एवं सभी फाइनलिस्ट प्रतिभागियों को ट्रॉफी एवं सम्मान प्रदान करते हुए बच्चों के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आत्मविश्वास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे—
कान्हा समूह (5–8 वर्ष)
* प्रथम – अर्पणा झा
* द्वितीय – श्राव्या चक्रवर्ती
* तृतीय – अनुभूति अवस्थी
माधव समूह (9–12 वर्ष)
* प्रथम – आद्य विश्वकर्मा
* द्वितीय – पार्थसारथी सिंह
* तृतीय – आयुषी मान्ना
केशव समूह (13–16 वर्ष)
* प्रथम – आश्विका अर्श
* द्वितीय – दिव्यांश गुप्ता
* तृतीय – आकृति गुप्ता
कार्यक्रम में श्री चंद्रकांत रायपत, श्री पीयूष मोरे, श्रीमती उषा प्रसाद, श्री ऋषिकेश रायपत, डॉ. पल्लवी पाण्डेय, श्री रूपम झा एवं श्री गोविंद खंडेलवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
आयोजन की सफलता में मोहित चोपड़ा, हर्षप्रीत कौर, पीयूष सिंह, सोनू मिश्रा, कविता दाम, अनिमेष निखिल एवं अनुज मीनोचा सहित पूरी आयोजन समिति एवं स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आयोजकों ने बताया कि ‘श्रुतिधारा’ का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि बच्चों में स्मरण शक्ति, एकाग्रता, स्पष्ट अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास, अनुशासन एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करना है। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान से जोड़ने का यह प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों, अभिभावकों, निर्णायकों, अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
