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पटना कोचिंग गैंगवार: गार्ड्स के कबूलनामे के बाद खान सर पर FIR दर्ज; व्यावसायिक रंजिश और कानून के बीच उलझा मामला

पटना: पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित कोचिंग हब में चल रही व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा ने तब एक गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया, जब पटना पुलिस ने देश के प्रसिद्ध शिक्षक और यूट्यूबर खान सर (फैसल खान) के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली. कदमकुआं थाना पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया है. यह कार्रवाई 2 जून की रात को खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग के बाहर हुई हिंसक झड़प और फायरिंग की जांच के बाद की गई है. दोनों पक्षों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद, यह पूरा मामला अब पटना के कोचिंग सिंडिकेट के आपसी टकराव को उजागर कर रहा है.

घटनाक्रम: तोड़फोड़ और कथित फायरिंग
विवाद की शुरुआत 2 जून 2026 की रात करीब 10:30 बजे हुई. खबरों के अनुसार, 15 से 20 युवकों की एक टोली ने खान सर के संस्थान के बाहर आकर नारेबाजी की, जिसके बाद दोनों पक्षों में पथराव और तोड़फोड़ शुरू हो गई. इस हिंसक झड़प में खान सर की सुरक्षा में तैनात एक गार्ड का सिर फट गया, जिसे इलाज के लिए पीएमसीएच (PMCH) में भर्ती कराया गया.

शुरुआती दौर में खान सर के समर्थकों ने आरोप लगाया कि प्रतिद्वंदी कोचिंग माफियाओं ने उनके बढ़ते प्रभाव और कम फीस के कारण उनके संस्थान पर हमला करवाया है. इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पहले ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रोशन आनंद और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

मामले में नया मोड़: सीसीटीवी और गार्ड्स का कबूलनामा

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच की. जांच के दौरान यह बात सामने आई कि हमलावरों की तरफ से नहीं, बल्कि खान सर के निजी गार्ड्स की तरफ से हवाई फायरिंग की गई थी.

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खान सर के दो बॉडीगार्ड्स (प्रदीप और तालेश्वर) को हिरासत में लिया. पूछताछ में गार्ड्स ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने खान सर के कहने पर ही अपनी राइफलों से चार राउंड हवाई फायरिंग की थी. इसके अतिरिक्त, जांच में यह भी पाया गया कि गार्ड्स के पास जो हथियारों के लाइसेंस थे, वे नागालैंड के पते पर जारी किए गए थे, जिनका उपयोग बिहार में करना अवैध है. इसी आधार पर पुलिस ने खान सर को भी इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया है.

दोनों पक्षों के तर्क: दो अलग पहलू

इस पूरे मामले को लेकर वर्तमान में दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं:

खान सर और समर्थकों का पक्ष: भीड़ द्वारा किए गए जानलेवा हमले से छात्रों और स्टाफ को बचाने के लिए आत्मरक्षा (Self-Defense) में फायरिंग की गई

पुलिस और प्रतिद्वंदी गुट का दावा: प्रतिद्वंदियों को डराने और इलाके में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए गोली चलाई गई

विवाद का कारण

खान सर और समर्थकों का पक्ष: मात्र ₹200-₹500 की कम फीस में पढ़ाने के कारण पटना के बड़े कोचिंग घराने खान सर को निशाना बना रहे हैं.

पुलिस और प्रतिद्वंदी गुट का दावा:बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के नतीजों के बाद सफल छात्रों के पोस्टर्स लगाने और उनके क्रेडिट को लेकर हुआ विवाद.

हथियारों की वैधता

पुलिस और प्रतिद्वंदी गुट का दावा: नागालैंड के अवैध लाइसेंस वाले हथियारों का उपयोग करके स्थानीय नियमों का उल्लंघन किया गया.

खान सर और समर्थकों का पक्ष: प्राथमिकता उस भीड़ और उपद्रवियों पर कार्रवाई की होनी चाहिए जिन्होंने संस्थान पर पथराव कर सुरक्षाकर्मी को घायल किया.

वर्तमान स्थिति और कानूनी प्रक्रिया

पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, पुलिस मामले की हर कड़ी की निष्पक्ष जांच कर रही है. गैर-जमानती धाराओं (हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट) के तहत मामला दर्ज होने के कारण खान सर की लीगल टीम अब गिरफ्तारी से बचने के लिए पटना हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी देने की तैयारी कर रही है. दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर यह मामला पूरी तरह विभाजित है—जहां एक ओर खान सर के लाखों छात्र उनके समर्थन में खड़े हैं, वहीं दूसरी ओर निजी कोचिंग्स में सुरक्षा नियमों और हथियारों की वैधता को लेकर कड़े सवाल उठाए जा रहे हैं.

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