झारखंड राज्यसभा चुनाव: ‘हिडन IPL टीम’ की तर्ज पर शह-मात का खेल, हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका से गरमाई सियासत
रांची: झारखंड में 18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। संख्या बल की कसौटी पर कमजोर होने के बावजूद विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) द्वारा उम्मीदवार उतारने के फैसले ने इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। इस रणनीतिक बिसात को राजनीतिक पंडित क्रिकेट की ‘हिडन आईपीएल टीम’ (Hidden IPL Team) की रणनीति की तरह देख रहे हैं, जहां परदे के पीछे से गुप्त गठजोड़ और अंतिम ओवरों में चौंकाने वाले पासे फेंकने की तैयारी चल रही है।
गठबंधन में खींचतान और उम्मीदवार तय
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही सत्तारूढ़ इंडिया (INDIA) गठबंधन के भीतर पहली दरार तब दिखी जब कांग्रेस ने बिना झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से चर्चा किए एकतरफा फैसला लेते हुए वरिष्ठ नेता प्रणव झा को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे नाराज जेएमएम ने शुरुआत में दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का मन बना लिया था। हालांकि, गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद शनिवार को जेएमएम ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपनी पहली पसंद के रूप में मैदान में उतारा। बैद्यनाथ राम 8 जून को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से गौरव वल्लभ को उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें तेज हैं।
आंकड़ों का गणित और दूसरी वरीयता का रोमांच
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार को सीधे राज्यसभा पहुंचने के लिए 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है। आंकड़ों के लिहाज से सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिसमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा-माले के 2 विधायक शामिल हैं। यह संख्या दोनों सीटें जीतने के लिए बिल्कुल सटीक है। वहीं विपक्ष (NDA) के पास केवल 24 वोट (भाजपा के 21 और सहयोगी दलों के 3) हैं, जो एक सीट जीतने के आंकड़े से भी 4 कम है। इसके बावजूद भाजपा द्वारा चुनावी मैदान में उतरने से यह साफ हो गया है कि मुकाबला अब दूसरी वरीयता के वोटों और क्रॉस-वोटिंग पर टिक गया है।
पुराना इतिहास: हॉर्स ट्रेडिंग का दाग
झारखंड का राज्यसभा चुनावी इतिहास ‘छिपी हुई टीमों’ के खेल और राजनीतिक सौदेबाजी से भरा रहा है। साल 2012 में एक निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में बड़े पैमाने पर धनबल के इस्तेमाल की खबरें आई थीं, जिसके बाद वोटिंग के दिन ही ₹2.15 करोड़ कैश बरामद होने पर चुनाव आयोग ने पूरे चुनाव को रद्द कर दिया था। इसके बाद 2016 और 2018 में भी विधायकों की अचानक गिरफ्तारी और क्रॉस-वोटिंग के चलते चुनावी गणित पूरी तरह पलट गया था। यही वजह है कि जेएमएम ने इस बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI, ED) की निगरानी बढ़ाने की मांग की है, ताकि किसी भी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग को रोका जा सके।
मुख्य राजनीतिक किरदारों के दिलचस्प दांव-पेच
* JMM (द किंगमेकर): झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के लिए यह चुनाव केवल सीट बचाने का नहीं, बल्कि साख का है। दिवंगत शिबू सोरेन की विरासत को आगे बढ़ा रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार फूँक-फूँक कर कदम रख रहे हैं। JMM ने अपनी ही सहयोगी कांग्रेस को कड़ा संदेश देने के लिए शनिवार को बैद्यनाथ राम के नाम का ऐलान आखिरी वक्त पर किया, ताकि गठबंधन में उसकी ‘बड़े भाई’ की भूमिका पर कोई आंच न आए।
* कांग्रेस (द सरप्राइज पैशनेट): कांग्रेस ने इस बार राजनीति के स्थापित नियमों को दरकिनार करते हुए JMM से पहले अपने उम्मीदवार प्रणव झा के नाम की घोषणा कर सबको चौंका दिया। दिल्ली आलाकमान के इस ‘पॉवर प्ले’ ने JMM को बैकफुट पर धकेला, जिससे यह साफ हो गया कि कांग्रेस अब राज्य में जूनियर पार्टनर बनकर रहने के मूड में नहीं है।
* BJP (द सीक्रेट स्ट्रैटेजिस्ट): भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गेम प्लान इस बार सबसे रहस्यमयी है। गौरव वल्लभ जैसे तेजतर्रार प्रवक्ता को मैदान में उतारने की अटकलों के बीच, भाजपा की नजर JMM और कांग्रेस के भीतर असंतुष्ट विधायकों की ‘नाराजगी’ पर है। भाजपा अंदरूनी कलह का फायदा उठाकर ‘क्रॉस-वोटिंग’ के जरिए विपक्ष के किले में सेंध लगाने की फिराक में है।