जेम पोर्टल विवाद: रांची ESIC अस्पताल में निविदा आवंटन में गड़बड़ी का आरोप, बालाजी डिटेक्टिव फोर्स ने खटखटाया जांच का दरवाजा
रांची: रांची स्थित ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मैनपावर आउटसोर्सिंग निविदा (टेंडर) आवंटन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय एजेंसी मेसर्स बालाजी डिटेक्टिव फोर्स (M/s Balajee Detective Force) ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल द्वारा सबसे कम बोली लगाने वाला (L1) घोषित किए जाने के बावजूद अनुबंध से बाहर किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत 176 चिकित्सा और प्रशासनिक पदों की आउटसोर्सिंग के लिए एक उच्च-मूल्य निविदा (बिड संख्या: GEM/2026/B/7186881) जारी की गई थी. इसमें बालाजी डिटेक्टिव फोर्स ₹8,79,62,969.11 की वित्तीय बोली के साथ जेम पोर्टल के ऑटो-रन/सिस्टम जेनरेटेड नियमों के तहत प्रथम L1 बिडर के रूप में चुनी गई थी। फर्म को 29 अप्रैल 2026 को एक स्वचालित संदेश प्राप्त हुआ था, जिसमें 72 घंटों के भीतर अपनी स्वीकृति की पुष्टि करने को कहा गया था ।
बालाजी डिटेक्टिव फोर्स ने निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल पर इस निविदा को ‘स्वीकार’ (Accept) भी कर लिया था। इसके बावजूद, निविदा क्रय समिति द्वारा कथित तौर पर इस स्थानीय एमएसएमई (MSME) को दरकिनार कर ‘इशा प्रोटेक्शनल सिक्योरिटी गार्ड प्राइवेट लिमिटेड’ नामक संस्था को वर्क ऑर्डर देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आनंद राज ने 6 मई 2026 को मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी-सह-निविदा क्रय समिति को एक औपचारिक शिकायत पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने कहा, “हमारी संस्था एक पंजीकृत MSME इकाई है। जेम पोर्टल द्वारा सर्वप्रथम हमारी संस्था को L1 घोषित किया गया और हमने समय पर इसे स्वीकार भी किया । इसके बाद किसी अन्य संस्था को अनुबंध देना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और नियमों के खिलाफ प्रतीत होता है।
“झारखंड खरीद नीति (Jharkhand Procurement Policy) के तहत, राज्य के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (MSEs) को निविदाओं में विशेष छूट और प्राथमिकताएं दी जाती हैं। ऐसे में एक वैध और योग्य स्थानीय एमएसएमई को नजरअंदाज किए जाने से यह मामला अब कानूनी रूप से पेचीदा हो सकता है।बालाजी डिटेक्टिव फोर्स ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। फर्म ने चेतावनी दी है कि या तो नियमों के तहत तत्काल उन्हें वर्क ऑर्डर निर्गत किया जाए, अथवा इस विसंगति को देखते हुए पूरी निविदा प्रक्रिया को ही निरस्त किया जाए। फिलहाल इस मामले पर संबंधित अस्पताल प्रशासन या निविदा समिति की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।