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हजारीबाग: मंत्री इरफान अंसारी की मौजूदगी में पत्रकार की पिटाई पर गरमाया विवाद

हजारीबाग:झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की मौजूदगी में पत्रकारों के साथ हुई बदसलूकी और मारपीट की घटना ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। 28 अप्रैल, 2026 को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई इस घटना ने प्रेस की स्वतंत्रता और सार्वजनिक प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरी घटना: क्या हुआ था उस दिन?

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग में एक दुखद तिहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। अस्पताल परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान, न्यूज़-18 के पत्रकार सुशांत कुमार सोनी और आशीष कुमार साहू ने मंत्री से चतरा एयर एम्बुलेंस हादसे और पीड़ितों के मुआवजे में हो रही देरी को लेकर तीखे सवाल पूछे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ये सवाल मंत्री के समर्थकों को नागवार गुजरे। भीड़ में मौजूद असामाजिक तत्वों ने पत्रकारों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। आशीष साहू को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

प्रतिक्रियाएं और विवाद

इस घटना के बाद राज्यभर के पत्रकार संगठनों और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश है:पत्रकार संगठनों की मांग: हजारीबाग और रांची प्रेस क्लब ने इस “अलोकतांत्रिक कृत्य” की कड़ी निंदा की है और मंत्री से माफी की मांग की है।

विपक्ष का हमला: भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना अब अपराध बनता जा रहा है।

मंत्री का पक्ष: डॉ. इरफान अंसारी ने खुद को घटना से अलग करते हुए दावा किया कि वे उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे और यह हमला शोक संतप्त परिजनों का भावनात्मक आक्रोश था, न कि उनके समर्थकों का।”

समय पर एक टिप्पणी बचा सकती थी सम्मान

इस पूरे विवाद में विशेषज्ञों और मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्री अंसारी ने उस समय धैर्य दिखाते हुए एक संतुलित टिप्पणी की होती, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।

चुप्पी ने बिगाड़ा खेल:

घटना के वीडियो में देखा जा सकता है कि हंगामा होने पर मंत्री हस्तक्षेप करने के बजाय अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गए।

नुकसान की भरपाई संभव थी

जानकारों का कहना है कि यदि मंत्री अपने समर्थकों को तुरंत शांत रहने का निर्देश देते या पत्रकारों के सवालों का शालीनता से जवाब देते, तो न केवल हिंसा टलती, बल्कि उनकी छवि एक जिम्मेदार नेता के रूप में निखरती।

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