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जैप-आईटी की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल: झारखंड कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी

रांची: झारखंड कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (JCA) ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों के पैनल चयन (Empanelment) के लिए जैप-आईटी (JAP-IT) द्वारा निकाली गई निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि विभाग द्वारा स्थानीय निविदाकारों की अनदेखी की जा रही है और उनके जायज सवालों के जवाब दिए बिना ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्य विवाद और एसोसिएशन के सवाल

झारखंड कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने जैप-आईटी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर छह प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:

* स्थानीय आरक्षण: निविदा में कुल कितनी एजेंसियों को सूचीबद्ध किया जाएगा और इसमें स्थानीय एजेंसियों के लिए कितने स्थान आरक्षित हैं?

* कार्य आवंटन में पारदर्शिता: एसोसिएशन का आरोप है कि पिछली बार (2021) एजेंसियों के चयन के बाद जैप-आईटी ने कार्य आवंटन का अधिकार विभागों को दे दिया था, जिससे भेदभाव की स्थिति बनी। क्या इस बार भी वही पुरानी पद्धति अपनाई जा रही है? (

* सर्विस चार्ज का मुद्दा: कर्मियों के मानदेय में तो 5% वार्षिक वृद्धि का प्रावधान है, लेकिन एजेंसियों के सर्विस चार्ज में बढ़ोतरी का कोई जिक्र नहीं है। एसोसिएशन की मांग है कि GeM पोर्टल की तर्ज पर इसे भी प्रतिशत में तय किया जाए।

* आरक्षण रोस्टर और पुराने कर्मी: निविदा में राज्य सरकार के नए आरक्षण रोस्टर का जिक्र नहीं है। ऐसे में पूर्व से कार्यरत कर्मियों की सेवा जारी रहेगी या उन्हें हटा दिया जाएगा, इसकी जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

‘अदालत की शरण में जाने को मजबूर’
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पत्र में स्पष्ट कहा है कि जैप-आईटी की वर्तमान प्रक्रिया एक “अनसुलझी पहेली” की तरह है। उन्होंने आशंका जताई है कि कार्य आवंटन और सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में ईमानदारी की कमी हो सकती है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि उनके सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले, तो निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले वे माननीय न्यायालय की शरण में जाने को विवश होंगे।

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