Ranchi: प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने पार्टी से पूर्व मंत्री योगेंद्र साव जी को निष्कासित किया है। इस पर अंबा प्रसाद ने कहा कि इनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे NTPC और राज्य प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ लगातार कई वर्षों से धरना-प्रदर्शन आदि कर रहे थे। उनका जो धरना-प्रदर्शन है, वह उनके साथ-साथ विधानसभा क्षेत्र के रैयतों के अधिकार के लिए किया गया, जो इन दिनों भू-अर्जन के तहत उचित मुआवजे और पुनर्वास के हक को लेकर पीड़ित हैं।
रैयतों को 2015 के बाद भी CBA अधिनियम के तहत मुआवजा देने की बात NTPC कर रही थी और हम लोग 2013 कानून के तहत मुआवजे की माँग कर रहे थे, जो कि एक जायज माँग है। क्योंकि पूर्व मंत्री योगेंद्र साव रैयतों की इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे थे, इसीलिए उनके साथ-साथ कई रैयतों के ऊपर NTPC के कहने पर दर्जनों मुकदमे दर्ज किए गए। पूर्व मंत्री श्री योगेंद्र साव जी को मुआवजा न देकर 01/08/2025 को उनका कारखाना तोड़ दिया गया और तब से गठबंधन सरकार के मंत्रियों और विधायकों को ये सारी बातें पता थीं। क्या किसी ने इस बात की सुध ली?
गठबंधन-गठबंधन बोलकर श्री योगेंद्र साव जी पर तो एक्शन ले लिया गया, पर उनकी और रैयतों की परेशानी की किसी ने सुध नहीं ली! योगेंद्र साव जी के निष्कासन के बाद JMM प्रवक्ता मनोज पांडे जी ने मीडिया बाइट दी कि “कोई मसला था तो बातचीत से हल करना चाहिए था और गठबंधन में मजबूती बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने निष्कासित करके सही कदम उठाया है।” हम लोग जब से राजनीति में आए हैं, तब से मनोज पांडे जी क्या कर रहे थे, यह हमें जानकारी नहीं है। वे हमें मसला हल करने का नियम समझा रहे हैं, तो गठबंधन की सरकार में मसला हल करने का कोई SOP भी निर्धारित कर दीजिए कि किस प्रक्रिया में मसला हल होगा और किसे इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी। कांग्रेस पार्टी और JMM पार्टी की गठबंधन नीति में वर्तमान में तो कोई मसला हल करने का SOP नहीं है।
गठबंधन की सरकार में मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करते हुए मुझे पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। वैसे मैं भी भूलने लगी थी कि मैं कांग्रेस पार्टी से हूँ, क्योंकि जब हम उचित मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे थे, तब गठबंधन में से हमने किसी को अपने आसपास नहीं देखा और न ही पार्टी को देखा। तो क्या अनुशासन एकपक्षीय होता है? मुख्यमंत्री पर बोलने पर अचानक पार्टी को लगता है कि ये कांग्रेस से हैं। हम सीट जीत कर आए तो हमारी वैल्यू है, और लगातार तीन बार जीतने के बाद एक बार हार गए तो हमारा कोई पूछने वाला नहीं है।
मुझे समझ में नहीं आता है कि पार्टी सरकार चलाती है या सरकार पार्टी चलाती है? मेरे घर में दो महिलाएँ थीं और उस घर को तोड़ने के लिए 2,000 पुलिस बल भेजे गए; पुलिस मंत्री भी मुख्यमंत्री ही हैं। क्या कभी मुख्यमंत्री महोदय ने हमसे पूछा था कि परेशानी क्या है? क्या पार्टी ने पूछा था कि परेशानी क्या है? आवेश में आकर एक टिप्पणी क्या कर दी, तो वह मेरा गुनाह हो गया? सालों से NTPC और स्थानीय प्रशासन हम पर जो जुल्म ढा रहा है, वह न तो “लोकप्रिय” मुख्यमंत्री जी को दिखा और न ही पार्टी को दिखा। सब सरकार बचाने में तुले हुए हैं, रैयत मरें या जिएं, इससे किसी को मतलब नहीं है।
JMM के प्रवक्ता मनोज पांडे जी बोलते हैं कि मिल-बैठकर मसला हल करना चाहिए था, तो वे गठबंधन में मसला हल करने का तरीका भी बता दें, क्योंकि हम लोग हर जगह अपनी समस्या पहुँचा चुके हैं। हमने तो आज तक कोई “अप्रिय” मुख्यमंत्री नहीं देखा है, सभी मुख्यमंत्री लोकप्रिय ही होते हैं, लेकिन क्या रैयत मुख्यमंत्री के लिए प्रिय हैं? इस सवाल का जवाब मुख्यमंत्री खुद देंगे। क्या कांग्रेस में कोई मंत्री लोकप्रिय नहीं है? क्योंकि उनके खिलाफ कई कांग्रेस विधायकों ने बोला है। मेरे पिताजी भी बोले हैं। क्या यह अनुशासन भंग की श्रेणी में नहीं आता है? या फिर वे अब लोकप्रिय नहीं हैं? अब प्रदेश कांग्रेस को यह बोलना पड़ रहा है और सर्टिफिकेट देना पड़ रहा है कि मुख्यमंत्री लोकप्रिय हैं या नहीं। मैंने तो कभी नहीं सुना कि कोई मुख्यमंत्री लोकप्रिय नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा जी, प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष रामेश्वर उरांव जी और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपाट झूठ बोला है कि हमने अपनी लड़ाई के मुद्दे और NTPC की मनमानी के खिलाफ पार्टी और सरकार को अवगत नहीं कराया और खामखा पार्टी-सरकार को बदनाम किया। इसका जवाब देने के लिए हो सकता है कि मुझे पार्टी के अनुशासन को तोड़ना पड़े और ऐसे दस्तावेज़ सामने लाने पड़ें जो पार्टी के अंदर की बात है। मुझे इस मजबूरी में धकेलने वाले कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष ही हैं, जो झूठ बोलकर प्रेस से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
अगर पार्टी और सरकार को हमारी लड़ाई की जानकारी नहीं थी, तो 22/08/2025 का यह कमेटी का कागज क्या है? जिसमें विधायक राजेश कच्छप, सुरेश बैठा और रामचंद्र सिंह जी की कमेटी बनी थी। हम और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव जी ने पार्टी के प्रदेश स्तर से लेकर केंद्रीय स्तर तक इस मुद्दे को उठाया है और मदद की गुहार भी लगाई है। इसी का नतीजा था कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के कहने पर 30/01/2026 को पुनः एक कमेटी का गठन हुआ, जिसमें वर्तमान सरकार के दो कैबिनेट मंत्री (स्वास्थ्य मंत्री और वित्त मंत्री) और तीन विधायक शामिल हैं। इसके बनने के बाद एक बार भी बैठक नहीं हुई और न ही किसी ने क्षेत्र में आकर सुध ली।
इस बीच जब मेरे पिताजी पूर्व मंत्री योगेंद्र साव जी का क्षोभ और दुख भरा वीडियो प्रकाशित हुआ, तब क्या अनुशासन समिति के अध्यक्ष सो रहे थे? सरकार के दो मंत्रियों को इस घटना की पूरी जानकारी है, क्या तब सरकार सो रही थी? क्या इस कमेटी के किसी सदस्य को आप लोगों ने आज तक बड़कागांव या केरेडारी में देखा है? इस मुद्दे पर छानबीन करते हुए मैं पूछती हूँ कि इससे ज्यादा और कौन सा तरीका है जिससे पार्टी के पास मुद्दा रखा जाता है?
मैं कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा जी और JMM प्रवक्ता मनोज पांडे जी, जो दोनों ही बड़े दिग्गज नेता हैं, उनसे पूछती हूँ—जो कभी चुनाव नहीं लड़े, कभी जनता के बीच नहीं गए और जिन्हें जनता के मुद्दों से कभी मतलब नहीं रहा, ये दोनों पार्टियों के “भोंपू” मीडिया से झूठ बोल रहे हैं कि हमने पार्टी या सरकार को बताया नहीं। आप लोग उनसे पूछिए कि वे मीडिया से झूठ क्यों बोल रहे हैं। विधायक राजेश कच्छप जी, रामचंद्र सिंह जी और सुरेश बैठा जी भी केरेडारी गए थे, बताइए वे क्यों गए थे?
जब आपने पब्लिक मीडिया में छीछालेदर करना शुरू किया है, तो पूरा ही हो जाए। कम से कम जनता को पता तो चलेगा कि कौन सच्चा है और कौन झूठा। अगर हिम्मत है तो मीडिया में आमने-सामने आइए और मेरे सवालों का जवाब दीजिए, मैं भी आपके सवालों का जवाब दूंगी। भाजपा के सांसद सीएम रमेश, जो बड़कागांव और केरेडारी में अवैध खनन कर रहे हैं, उन्होंने जब मेरे राजनीतिक करियर को बर्बाद करने की धमकी दी और मेरे पिताजी को जेल में डालने की धमकी दी (जो रिकॉर्ड में है), तब भी पार्टी के सभी लोग बचने की कोशिश करते रहे और किसी का साथ नहीं दिखा।
अगर पार्टी के पदाधिकारी झूठ न बोलते, तो मैं ये कागज नहीं निकालती। अब आप प्रेस में आकर हमारे खिलाफ झूठ बोलेंगे और जनता में हमारी छवि खराब करेंगे, तो मैं भी आपका “साफ-सुथरा” चेहरा दिखा देती हूँ। अनुशासन समिति के अध्यक्ष महोदय, मजबूरी में मैंने थोड़ा अनुशासन तोड़ा है और आप ही लोगों ने झूठ बोलकर मुझे मजबूर किया है। मैं अपने और अपने परिवार के आत्मसम्मान को विसर्जित करके राजनीति नहीं कर सकती।
पार्टी का संविधान और अनुशासन के नियम होते हैं, पर कौन सा नियम कहता है कि बिना सूचना या नोटिस दिए कांग्रेस के ऐसे वरिष्ठ सदस्य को सीधे निष्कासित कर सकते हैं? पार्टी के लोगों को प्रेस में यह क्यों बोलना पड़ रहा है कि उन्होंने किसी के “दबाव” में यह नहीं किया? आपकी कार्यशैली बताती है कि दबाव है। इस समय कोई लोकसभा चुनाव नहीं है, उसमें अभी 3 साल और कुछ महीने बाकी हैं।
योगेंद्र साव को निष्कासित करने की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी जी को प्रधानमंत्री बनाने का मुद्दा कहाँ से आ गया? उनका नाम क्यों घसीटा गया? क्या इसलिए कि मैं उनसे मिलकर आई थी? जब आप लोगों ने मदद नहीं की, तब मुझे उनसे मिलना पड़ा। आपकी बातों से ऐसा लग रहा है कि जैसे योगेंद्र साव जी को निष्कासित नहीं करते, तो राहुल गांधी जी के प्रधानमंत्री बनने के चांस कम हो जाते। आपने बेवजह केंद्रीय वरिष्ठ नेतृत्व का नाम इस मुद्दे में उछाला है। शायद इसीलिए प्रदेश कांग्रेस को “हिट” किया गया क्योंकि हम सीधे (डायरेक्ट) हो गए थे।