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भारत में महिला आयोग के आलोचनात्मक समीक्षा की आवश्यकता

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर विशेष

भारत में महिला आयोग की स्थापना वृहद् वादे और उच्च आकांक्षाओं के साथ की गई थी, जहाँ अन्तर्राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर महिलाओं के अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए समर्पित संस्थानों के रूप में परिकल्पित किया गया था, लेकिन समय गुजरने के साथ महिलाओं से सम्बन्धित महत्वपूर्ण मुद्दो पर उनकी कार्य प्रणाली एवं प्रक्रियाओं की आलोचनात्मक समीक्षा करने की आवश्यकता स्पष्ट हो गयी है। मणिपुर में महिलाओं से छेड़‌छाड़ और बलात्कार की हालिया घटनाओं जिससे मानवीय गरिमा एवं अधिकारों की क्रूर उपेक्षा की चिंताजनक स्थिति सामने आई है, ने इन आयोगों के कार्यप्र‌णाली की ओर देश का गहन ध्यान आकर्षित किया है।

महिला आयोग:

राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for women) N.C.W- N.C.W. भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय है, जो आमतौर पर महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत मामलों पर सरकार को सलाह देता है। इसका गठन जनवरी 1992 में भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत किया गया था, जैसा कि राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 में परिभाषित किया गया था। N.C.W का उद्देश्य भारत में महिलाओं के अधिकारों का प्रतिनिधित्व करना और उनसे जुड़े मु‌द्दों एवं चिन्ताओं के लिए सुरक्षा प्रदान करना है। दहेज, राजनीतिक मामले, धार्मिक मामले एवं नौकरियों में महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करता है N.C.W हिंसा, भेदभाव, उत्पीड़न की शिकार या अपने अधिकारों से वंचित महिलाओं की शिकायतों को भी स्वीकार करता है और मामलों की जाँच करता है। राज्य महिला आयोग (State commissions for Women) राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for women) N.C.W के अलावा, भारत के विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में राज्य महिला आयोगों का भी गठन किया गया है। ये आयोग सम्बन्धित राज्य अधिनियमों या आदेशों के तहत गठित किये गये हैं और N.C.W, के समान ही कार्य और शक्तियाँ रखते हैं।

महिला आयोग के उद्देश्य एवं कार्य:

उद्देश्य:

महिलाओं के अधिकारों का प्रतिनिधित्व:

राष्ट्रीय महिला आयोग का प्राथमिक उद्देश्य भारत में महिलाओं के अधिकारों का प्रतिनिधित्व एवं संवर्धन करना है। वे महिलाओं के मुद्‌दों एवं चिन्ताओं को अभिव्यक्ति प्रदान करते है और समाज में महिलाओं के समक्ष विद्यमान विभिन्न चुनौतियों को हल करते हैं। महिला आयोगों को महिलाओं को प्रभावित करने वाले नीतिगत मामलों पर सरकार को सलाह देने का कार्य सौंपा गया है। वे लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओ के अधिकारों की रक्षा करने से सम्बन्धित नीतियों एवं संविधान को आकार देने के लिए मूल्यवान अनुशंसा और सुझाव प्रदान करते है। महिला आयोग भारतीय संविधान और अन्य कानूनों के तहत महिलाओं को प्रदत्त सुरक्षा उपायों से सम्बन्धित सभी मामलों की जाँच एवं परीक्षण के लिए जिम्मेदार है। वे सुनिश्चित करते हैं कि महिलाओं के लिए संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा को बरकरार रखा जाय और प्रभावी ढंग से कार्यान्वन किया जाए।

इन आयोगों को महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन से सम्बन्धित शिकायतों का समाधान करने का दायित्व सौंपा गया है। वे महिलाओं के साथ भेदभाव, उत्पीड़न, हिंसा और अन्य अन्याय के मामलों की जाँच करने और समाधान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महिला आयोग शिकायतों पर प्रतिक्रिया देने के अलावा महिला अधिकारों से वंचित और महिलाओं की सुरक्षा के उ‌द्देश्य से बना‌ए गए कानूनों के गैर-अनुपालन से सम्बन्धित मामलों का स्वतः संज्ञान (SUO MOTU) भी ले सकता है। इससे उन्हें महिलाओं को प्रभावित करने वाले उभरते मुद्दों को स्वीकार्य रूप से सम्बोधित करने का अवसर मिलता है। महिला आयोग महिलाओं के आर्थिक विकास और महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिला आयोग का लक्ष्य है कि महिलाओं को हर प्रकार के रोजगार के अवसर मिले।

महिला आयोग के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ:

महिला आयोगों को प्राय: वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वे सरकारी वृत्तपोषण पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं, जो उनकी सक्रियता को प्रभावित कर सकता है तथा प्रभावी ढंग से कार्य कर सकने की उनकी क्षमता को बाधित कर सकता है। सत्तारूढ़ सरकार द्वारा मनोनीत होने के कारण महिला आयोगों को उन मामलों से बचने के लिए दवाब का सामना करना पड़ सकता है जो सम्भावित रूप से सरकार या उसके सहयोगियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यह राजनीतिक हस्तक्षेप महिलाओं के अधिकारों के प्रति आयोग की निष्पक्षता एवं प्रतिबद्धता को कमजोर कर सकता है। महिलाओं की एक बड़ी संख्या (विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में) महिला आयोगों के अस्तित्व और भूमिका से प्राय: अवगत नहीं है।

N.C.W. को प्रमुख उपब्धियाँ:

N.C.W, नें घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 और और दहेज उत्पीड़न अधिनियम, 1961 जैसे महिलाओं के अधिकारों से सम्बन्धित कानूनों के कार्यान्वन को सुदृढ़ करने में मदद की है। इसमें हिंसा और यौन उत्पीड़न क़ी शिकार महिलाओं को कानूनी और मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रदान किया है। इसने कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का कार्यान्वन और इसकी निगरानी सुनिश्चित की है। इसमें सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में (लक्षद्वीप को छोड़कर) महिलाओं की स्थिति एवं उनके सशक्तीकरण का आकलन करने के लिए जेंडर प्रोफाइल तैयार किया है। इसने कार्यशालाओं/परामशों का आयोजन किया है महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेषज्ञ समितियों का गठन किया है, लिंग जागरूकता के लिए कार्यशालाएँ/ सेमिनार आयोजित किये हैं और कन्या- भ्रूण हत्या, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा आदि के खिलाफ प्रचार अभियान चलाया है ताकि इन सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध समाज में जागरूकता उत्पन्न हो सकें।

महिला आयोग में सुधार के लिए रणनीतियाँ

पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया:

महिला आयोगों के अध्यक्षों एवं सदस्यों की नियुक्ति के लिए योग्यता आधारित एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनायी जानी चाहिए। समाज के प्रबुद्ध लोगों, स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के लोगों को शामिल करने से आयोग का कार्य प्रभावी ढंग से हो सकेगा। महिला आयोगों के प्रदर्शन, धन के उपयोग और पराभव का आकलन करने के लिए बाह्य एजेसियों की सहायता से नियमित रूप से इनका सामाजिक लेखा परीक्षण (Social Audit) किया जाना चाहिए, यह इन्हें जवाबदेह बनाएगा और सुधार के लिए अन्तर्दृष्टि प्रदान करेगा। आयोग के सदस्यों और कर्मियों को अधिक दौरे करने, विभिन्न भू-भागों में महिलाओं के साथ संवाद करने और उनकी अनूठी चुनौतियों एवं आवश्यकताओं को समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए| हेल्पलाइन, ऑनलाइन प्लेट फॉर्म और मोबाइल आउटरीच जैसे विभिन्न चैनलों के माध्यम से, विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रो में महिलाओं के बीच महिला आयोगों के बारे में अत्यधिक जागरूकता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

संकटग्रस्त महिलाओं के प्रति सहानुभूति और संवेदनशीलता विकसित करने के लिए आयोग के सदस्यों और कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए। महिला सशक्तिकरण महिलाओं को विभिन्न सामाजिक समस्याओं के माध्यम से जीवन-निर्धारक निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। उन्हें लैंगिक भूमिकाओं या ऐसी अन्य भूमिकाओं को पुनर्परिभाषित करने का अवसर मिल सकता है, जिससे उन्हें वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने की अधिक स्वतंत्रता मिलती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं की महिला आयोग महिलाओं के उत्थान में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

अखिलेश सिंह ‘चंदेल’
डायरेक्टर
तालुकदार कृषक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड
मो ० न० – 7068991602

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