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आजसू छात्र संघ जनाक्रोश मार्च

विभिन्न जिलों के हज़ारों की संख्या में छात्रों ने सड़क पर उतरकर भरी हुंकार

रांची: “शिक्षा के लिए भिक्षा : जनाक्रोश मार्च” में आजसू छात्र संघ ने अपनी ताकत दिखाई। बापू वाटिका से निकलकर छात्रों ने राजभवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया तो मछलीघर के पास पुलिस ने जनाक्रोश मार्च को कांके रोड होते हुए रातु रोड की तरफ डायवर्ट कर दिया। इसके बाद छात्र रातु रोड की तरफ से राजभवन की ओर बढ़े तो पुलिस ने फ्लाईओवर के पास रोक दिया। आजसू नेताओं को पुलिस के साथ तीखी झड़प हो गई। इसके बाद आजसू कार्यकर्ता नेता वहीं सड़क पर बैठ गए और हेमंत सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके बाद प्रशासन ने आजसू छात्र संघ को राजभवन को ज्ञापन देने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल की अनुपस्थिति में आजसू नेताओं ने राजभवन कार्यालय को ज्ञापन सौंप दिया।

आज बापू वाटिका, मोराबादी से आजसू छात्र संघ के हजारों कार्यकर्ता राजभवन के लिए जनाक्रोश मार्च शुरू किया। मार्च में राँची, लोहरदगा, गुमला, हज़ारीबाग, रामगढ़, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो सहित विभिन्न जिलों के सैकड़ों कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र–छात्राओं ने बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होकर लंबित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति भुगतान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

जनाक्रोश मार्च का नेतृत्व आजसू छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, पीयूष चौधरी, महासचिव विशाल महतो, युवा आजसू के महानगर अध्यक्ष अमित यादव समेत अन्य नेताओं ने किया। इस मौके पर वरीय नेता संजय मेहता भी उपस्थित रहे।

हाथों में बैनर, पोस्टर, स्लोगन और छात्रवृत्ति भुगतान की माँग को लेकर छात्र समूह राजभवन की ओर बढ़े और मार्ग भर सरकार की लापरवाही के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते रहे।

राजभवन पहुँचकर छात्र प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और आग्रह किया कि लंबित 2024–25 छात्रवृत्ति के तत्काल भुगतान किया जाए और e-Kalyan पोर्टल पर सभी लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक किया जाए। जिला स्तर पर हुई गंभीर देरी की जाँच हो और पारदर्शी तथा समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया जाए।

छात्र नेताओं का सरकार पर सीधा सवाल

प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा की आज का मार्च किसी पार्टी या व्यक्ति का आंदोलन नहीं था। यह उन लाखों विद्यार्थियों की पुकार थी, जो बेहतर शिक्षा, समान अवसर और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं। झारखंड सरकार को स्पष्ट संदेश मिल गया है , शिक्षा के साथ अन्याय अब बर्दाश्त नहीं होगा।

कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने कहा आज की वर्तमान सरकार अगर हर अंतिम छात्र को उसकी पूर्ण छात्रवृत्ति नहीं देती है, तो यह आंदोलन एक पल के लिए भी नहीं रुकेगा। न एक छात्र छूटेगा, न एक माँग अधूरी रहने दी जाएगी। आज सत्ता मौन है, इसलिए हमारी आवाज़ और प्रखर होगी। यह लड़ाई छात्रवृत्ति की नहीं, न्याय, अधिकार और जवाबदेही की है।

दया नहीं, अधिकार

प्रदेश उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने तीखे शब्दों में कहा की छात्रवृत्ति कोई दया नहीं, यह हमारा अधिकार है। सरकार की चुप्पी ने लाखों विद्यार्थियों का अकादमिक वर्ष खतरे में डाल दिया है। अगर समाधान नहीं मिला तो छात्रों की आवाज़ और ऊँची होगी। यह लड़ाई ‘शिक्षा बचाओ’ की है और इसे पूरे दमखम के साथ लड़ा जाएगा।

इसके अलावा देवा महतो,प्रताप सिंह,सत्यम सिंह,शुभम राणा,अमित सोनी ,सक्षम झा,अमन साहू ,मोहन रविदास ,रवि रोशन,सौरभ यादव,कार्तिक गुप्ता,बिक्की हरिवंश, राजकिशोर महतो,जमाल गद्दी ,अमित यादव, दीपक महतो,प्रशांत महतो आदि नेताओं ने जनाक्रोश मार्च को सफल बनाने में योगदान किया।

छात्र आजसू का आंदोलन व्यापक तौर पर सफल : संजय मेहता

आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने कहा की आजसू छात्र संघ का छात्रवृति की माँग को लेकर आंदोलन व्यापक तौर पर सफल रहा। सरकार छात्रों की बातों को सुने और संज्ञान में ले।

यह आंदोलन स्वतः स्फूर्त था। आजसू छात्र संघ के आह्वान पर कैंपस से छात्र स्वयं आंदोलन में सम्मिलित होने पहुँचे। इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया है की सरकार आवेदन के ज़रिए किसी की बात नहीं सुन रही। समाज के सभी वर्गों को सरकार ने सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है।

लाखों छात्रों के छात्रवृति को पेंडिग रखना युवा पीढ़ी को पढ़ाई से वंचित करने जैसा है। सरकार छात्र एवं युवाओं की भावनाओं को समझे। एक तरफ़ सरकार बड़े – बड़े इवेंट में खर्च कर रही है दूसरी तरफ़ छात्र छत्वृति से वंचित हैं।

लाखों मेधावी छात्र-छात्राओं की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति महीनों से पेंडिंग पड़ी है। इसका सीधा मतलब है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। एक तरफ सरकार बड़े-बड़े आयोजनों, विज्ञापनों और इवेंटों में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, दूसरी तरफ हमारे बच्चे दो वक्त की रोटी व किताब-कॉपी के लिए मोहताज हो रहे हैं। यह दोहरा चरित्र बर्दाश्त से बाहर है।

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