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सामान्य वर्ग के गरीबों को भी न्याय मिले, राजनीतिक दलों की दोहरी नीति खत्म हो: एडवोकेट संजीव राजपूत

नई दिल्ली: एडवोकेट संजीव राजपूत ने देश की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर हो रही राजनीति में सामान्य वर्ग के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार और सभी राजनीतिक दलों को जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक आधार पर न्याय और समान अवसर की नीति पर काम करना चाहिए।

एडवोकेट राजपूत ने कहा, “संविधान हर नागरिक को समानता, सम्मान और न्याय का अधिकार देता है। कोई भी कानून किसी निर्दोष के खिलाफ हथियार नहीं बनना चाहिए। कानून का उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा होना चाहिए, न कि किसी को डराना या प्रताड़ित करना।”

उन्होंने मांग की कि यदि सरकार सही मायने में सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है, तो सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए भी शिक्षा, रोजगार, आर्थिक सहायता और कानूनी सुरक्षा की ठोस और प्रभावी व्यवस्था की जाए। केवल चुनाव के समय सामान्य वर्ग को याद करना और बाद में उसकी समस्याओं को भुला देना अब नहीं चलेगा।

राजनीतिक दलों से सवाल करते हुए उन्होंने पूछा – सामान्य वर्ग का गरीब आखिर जाए तो कहां जाए? उसके रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तंगी और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे संसद और विधानसभाओं में उतनी गंभीरता से क्यों नहीं उठाए जाते?

उन्होंने कहा कि देश को आज ऐसी राजनीति की जरूरत है जो समाज को जातियों में बांटने के बजाय गरीब और अमीर के बीच की वास्तविक खाई को समझे। हमारा उद्देश्य किसी भी वर्ग के अधिकारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि गरीब व्यक्ति चाहे किसी भी जाति का हो, उसे बराबरी का अवसर और न्याय मिले।

सामाजिक और धार्मिक संगठनों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि उन्हें केवल अपने संगठन के विस्तार तक सीमित न रहकर, जमीन पर उतरकर गरीब, कमजोर और वंचित परिवारों की शिक्षा, रोजगार, कानूनी मदद और सामाजिक सुरक्षा के लिए काम करना होगा।

अंत में एडवोकेट संजीव राजपूत ने स्पष्ट कहा – “हम किसी के अधिकार छीनने की बात नहीं कर रहे हैं। हमारी सिर्फ एक ही मांग है कि सामान्य वर्ग के गरीब नागरिक को भी बराबरी का हक, सम्मान और न्याय मिले। सामाजिक न्याय का मतलब किसी एक वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद तक न्याय पहुंचाना है।”

उन्होंने सरकार से मांग की कि जाति आधारित राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक आधार पर समान अवसर की नीति, कानून के दुरुपयोग पर सख्त रोक और सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए ठोस कल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएं।

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