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महाशक्तियों के संगठित प्रयास का परिणाम हैं मां दुर्गा

गुड़िया झा

अभी हमारे देश में चारो ओर मां दुर्गा के आगमन को लेकर भक्तिमय और खुशी का माहौल है। नवरात्रि हमें संदेश देता है कि संगठन में बहुत ही शक्ति है। संगठित होने से ही परिवार, समाज और राष्ट्र की समस्याओं का समाधान हो सकता है। इन नौ दिनों में हम अपना पूरा ध्यान मां की पूजा अर्चना में ही समर्पित करते हैं। विज्ञान भी अध्यात्म को मानता है।

जब धार्मिक किताबों की बात आती है तो अनायास ही श्रीदुर्गा सप्तशती का नाम भी जुबान पर आ ही जाता है। इस किताब के प्रत्येक अध्याय से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। स्वयं मां दुर्गा की संरचना ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इंद्रादि, और अन्य देवों के शरीर से उत्पन्न एक महान तेजपुंज के रूप में एक साथ परस्पर मिलने से हुई।

इसी तरह हमारे जीवन में भी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए स्त्री या पुरूष शक्ति नहीं, बल्कि संगठित शक्ति की जरूरत है। संगठन से ही इनका मुकाबला किया जा सकता है। संगठन को मजबूत करने के लिए भी हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। संगठन जीवन के मनोदशा को बदलने वाली एक ऐसी शक्ति है जिसके आगे बड़ी से बड़ी बाधाएं भी आसानी से टल जाती हैं।

दुर्गा पूजा की तैयारी से ही हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है कि किस तरह पूरे देश में सैकड़ों, हजारों की संख्या में लोग रातों को जागकर पूजा पंडालों की तैयारी को अंतिम रूप देते हैं।

आज जो हमारे देश में समस्याएं हैं, उनके लिए भी संगठन में रहकर ही उसे दूर किया जा सकता है। अपने संगठन को मजबूत बनाना बहुत मुश्किल नहीं है। इसके लिए थोड़ी सी सहजता हमें रखनी होगी और शुरूआत भी स्वयं से ही करनी होगी। तभी यह एक मजबूत पिलर की तरह काम करेगा।

जाति और धर्म से ऊपर उठकर कार्य करने की आवश्यकता– यह किसी भी धार्मिक ग्रंथ में नहीं लिखा है कि जाति और धर्म के आधार पर हम बंट जाएं। आज हमारे देश में अधिकांश समस्याएं जाति और धर्म को लेकर ही उत्पन्न होती हैं। जहां शिक्षा के स्तर में काफी सुधार और बदलाव हुए हैं, वहीं जाति और धर्म के नाम पर संगठन में दरारें आ रही हैं।
परिवार, समाज और देश का विकास भी तभी संभव है जब हमारा संगठन मजबूत होगा। इसलिए जहां कहीं भी अपनी आवश्यकता महसूस हो अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देकर आगे बढ़ें।

सभी धर्मों का सम्मान हो – देश में आपसी भाईचारा बना रहे इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि सभी धर्मों का सम्मान हो। अपने पराये की भावना से ऊपर उठकर विकास की ओर बढ़ें। “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना”। आज देश में आतंकवादी गतिविधियां काफी सक्रिय हो गई हैं। देश की सीमा पर रक्षा करने वाले जवान शहीद हो रहे हैं।
आज हम रातों को चैन की नींद इसलिए सोते हैं क्योंकि हमारे जवान रातों को जागकर देश की रक्षा करते हैं। ऐसे कठिन समय में राजनीति का नाम न देकर जनहित में कार्य करने की आवश्यकता है।

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