Ranchi: भाजपा झारखंड की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने हेमंत सोरेन सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड में अल्पसंख्यक समाज के साथ सिर्फ वादों के साथ वोट बैंक की राजनीति हो रही है।
राफिया ने कहा कब्रिस्तान की बाउंड्री कराना गलत नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि मुर्दों की हिफाजत की चिंता करने वाली हेमंत सरकार और उनके मंत्री हाफिजुल अंसारी हैं परंतु जिंदा अल्पसंख्यक समाज के बच्चों और अल्पसंख्यक समुदाय की भविष्य की चिंता कब होगी? कब्रिस्तान की दीवारें खड़ी हो रही हैं, लेकिन उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के अंधकार भरी ज़िंदगी और भविष्य के बीच की दीवारें कौन गिराएगा?
राफिया नाज़ ने कहा कि उर्दू शिक्षक बहाली की लंबित प्रक्रिया सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उर्दू सहायक आचार्य के लगभग 7000 से अधिक पदों की स्वीकृति हुई थी। यदि इतने पद स्वीकृत होने के बावजूद नियुक्तियां लंबित हैं, तो इसका जवाब कौन देगा? क्या अल्पसंख्यक
[19/10, 6:27 pm] Meta AI: *हेडलाइन: हेमंत राज में मुर्दों के लिए बाउंड्री, जिंदा बच्चों के भविष्य पर ताला : राफिया नाज*
*रांची:* भाजपा झारखंड की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने हेमंत सोरेन सरकार पर अल्पसंख्यक समाज को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि झारखंड में हेमंत सरकार और झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सिर्फ वादों के सहारे अल्पसंख्यकों को वोट बैंक समझकर राजनीति कर रहा है।
राफिया ने कहा कि कब्रिस्तान की बाउंड्री कराना गलत नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि मुर्दों की हिफाजत की चिंता करने वाली हेमंत सरकार को जिंदा अल्पसंख्यक बच्चों के भविष्य की चिंता कब होगी? मंत्री हफीजुल अंसारी सिर्फ कब्रिस्तान की दीवारों की बात करते हैं, लेकिन उर्दू स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य पर लगे ताले पर चुप हैं।
उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की दीवारें तो खड़ी हो रही हैं, लेकिन उर्दू पढ़ने वाले बच्चों की अंधकार भरी जिंदगी और भविष्य के बीच खड़ी दीवार को कौन गिराएगा?
राफिया नाज ने उर्दू शिक्षक बहाली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में उर्दू सहायक आचार्य के लगभग 7000 से अधिक पदों की स्वीकृति हुई थी, इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया सालों से लंबित है। अगर इतने पद स्वीकृत हैं तो बहाली क्यों नहीं हो रही, इसका जवाब सरकार को देना होगा।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के बच्चे बिना शिक्षकों के पढ़ने को मजबूर हैं, उर्दू स्कूलों में ताले लगे हैं। सरकार अल्पसंख्यक कल्याण के नाम पर सिर्फ कब्रिस्तान घेराबंदी को उपलब्धि बता रही है, जबकि शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर पूरी तरह विफल है।
राफिया ने मांग की कि हेमंत सरकार अल्पसंख्यकों को वोट बैंक समझना बंद करे और लंबित उर्दू शिक्षक बहाली को तुरंत पूरा करे।