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बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा ने आयोजित किया 36वां दीक्षांत समारोह;

भारत के भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का हिस्सा बनने जा रहे स्नातकों के लिए नए अध्याय की शुरुआत

रांची: बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा ने अपना 36वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह समारोह वर्ष 1955 में शुरू हुई शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र-निर्माण की सात दशकों की विरासत में एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अवसर पर स्नातक, स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट और डिप्लोमा कार्यक्रमों के 2,984 विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया। ये विद्यार्थी अब उद्योग, अनुसंधान, उद्यमिता और देश की प्रगति को आकार देने वाले अन्य क्षेत्रों में अपने करियर के अगले चरण की शुरुआत कर रहे हैं।

इस समारोह में भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत कुमार मोहंती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ बीआईटी मेसरा के चांसलर श्री सी.के. बिरला और वाइस चांसलर प्रो. इंद्रनील मन्ना भी मौजूद रहे। इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों और अभिभावकों ने भी भाग लिया। समारोह ने संस्थान की शैक्षणिक विरासत को विकसित भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी आवश्यकताओं से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।

समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और संस्थान की प्रार्थना के साथ हुई, जिसके बाद दीक्षांत समारोह की औपचारिक कार्यवाही संपन्न हुई।
इस अवसर पर बीआईटी मेसरा के चांसलर श्री सी.के. बिरला ने कहा, “आप अपने जीवन के अगले चरण की शुरुआत कर रहे हैं। याद रखें कि डिग्री के साथ यह जिम्मेदारी भी आती है कि आप अपने ज्ञान और अवसरों का उपयोग समाज के लिए सार्थक योगदान देने में करें। आप जिस दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं, वह तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल रूपांतरण और अंतरिक्ष नवाचार हमारे जीने और काम करने के तरीकों को बदल रहे हैं। तकनीकी ज्ञान महत्वपूर्ण बना रहेगा, लेकिन निरंतर सीखते रहने, बदलावों के अनुरूप ढलने, विभिन्न विषयों के बीच काम करने, अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने और सही निर्णय लेने की आपकी क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। पेशेवरों और भावी नेतृत्वकर्ताओं के रूप में, प्रौद्योगिकी का जिम्मेदारी से उपयोग करें और अपने चरित्र, भरोसे तथा मूल्यों को हमेशा मार्गदर्शक बनाए रखें। रास्ते में असफलताएं और निराशाएं आएंगी, लेकिन वे भी महत्वपूर्ण सबक बन सकती हैं। निरंतरता, विश्वसनीयता और ईमानदारी के साथ अपना करियर बनाएं तथा समाज और राष्ट्र की प्रगति में सार्थक योगदान देने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करें।”

स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने कहा, “भारत तकनीकी परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में हो रही प्रगति नई संभावनाएं पैदा कर रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत स्वदेशी क्षमताओं और वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा उद्यमियों की एक कुशल पीढ़ी की आवश्यकता होगी। इसके लिए निरंतर अनुसंधान, विभिन्न विषयों के बीच सहयोग और मानव संसाधनों में निवेश आवश्यक है। बीआईटी मेसरा अनुसंधान को मजबूत करने और ज्ञान को प्रौद्योगिकी तथा समाज के लिए उपयोगी समाधानों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैं स्नातक होने वाले विद्यार्थियों को जीवनभर सीखने के लिए तैयार रहने, जिज्ञासु बने रहने, विभिन्न विषयों के बीच सहयोग करने तथा उत्कृष्टता और ईमानदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। आपकी डिग्री आपको ज्ञान देती है, लेकिन आपका चरित्र यह तय करेगा कि आप इस ज्ञान का उपयोग एक अधिक नवाचारी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में कैसे करते हैं।”

बीआईटी मेसरा के वाइस चांसलर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा, “बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा में शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं है। हम विद्यार्थियों को आलोचनात्मक सोच विकसित करने, स्थापित विचारों पर सवाल उठाने, जटिल समस्याओं को हल करने और ज्ञान को समाज की सेवा करने वाले समाधानों में बदलने के लिए तैयार करते हैं। वर्ष 1955 में अपनी स्थापना के बाद से, बीआईटी मेसरा ने इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में एक मजबूत विरासत स्थापित की है। इसकी शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों का विस्तार नए उभरते क्षेत्रों में लगातार हो रहा है। भारत विकसित भारत के दृष्टिकोण की ओर आगे बढ़ रहा है और इसी क्रम में संस्थान शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता तथा प्रौद्योगिकी विकास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे स्नातक इस आधार को साथ लेकर पेशेवर जीवन में प्रवेश करते हैं। हम उन्हें प्रोत्साहित करते हैं कि वे आने वाले वर्षों में शोधकर्ताओं, उद्यमियों, मार्गदर्शकों और सहयोगियों के रूप में बीआईटी मेसरा से जुड़े रहें।”

36वें दीक्षांत समारोह में बीआईटी मेसरा के विभिन्न परिसरों में कुल 2,984 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए। इनमें 113 पीएचडी शोधार्थी, 691 स्नातकोत्तर विद्यार्थी, 2,004 स्नातक विद्यार्थी और 176 डिप्लोमा प्राप्तकर्ता शामिल थे। अपने-अपने कार्यक्रमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कई स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए।
स्नातक होने वाले विद्यार्थी अब बीआईटी मेसरा के व्यापक पूर्व छात्र समुदाय का हिस्सा बन गए हैं, जो देश और विदेश में फैले पेशेवर एवं शैक्षणिक नेटवर्क से उन्हें जोड़ता है। यह नेटवर्क उद्योग, शिक्षण एवं अकादमिक जगत, अनुसंधान और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में विभिन्न पीढ़ियों के पूर्व छात्रों को जोड़ता है और स्नातक होने के बाद भी संस्थान के साथ उनका जुड़ाव बनाए रखता है।

समारोह का समापन गणमान्य अतिथियों के सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके साथ बीआईटी मेसरा का 36वां दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ।

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