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कोयलांचल की पहचान केवल कोयले और खनन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए: राज्यपाल

Ranchi: राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि कोयलांचल की पहचान केवल कोयले और खनन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह क्षेत्र ज्ञान, तकनीक, अनुसंधान, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। राज्यपाल महोदय आज बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि महान शिक्षाविद् एवं जननेता स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो जी ने शिक्षा को सामाजिक जागरूकता, आत्मसम्मान और परिवर्तन का माध्यम बनाने का संदेश दिया। विद्यार्थियों को अपनी उपलब्धियों के साथ समाज की प्रगति में भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोयलांचल ने देश के औद्योगिक विकास और ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज इस क्षेत्र के सामने पर्यावरण संरक्षण, खनन क्षेत्रों की सुरक्षा, श्रमिकों का कल्याण और बदलती ऊर्जा आवश्यकताओं जैसी चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए विश्वविद्यालय को स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े शोध को प्रोत्साहित करते हुए विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण, ऊर्जा और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में नए समाधान विकसित करने चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्टार्टअप और उद्यमिता ने युवाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। इनका लाभ उठाने के लिए विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा के साथ कौशल, रचनात्मकता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपनी योग्यता और नवाचार के माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की सफलता केवल उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास में उनके योगदान से भी आँकी जाती है। विश्वविद्यालय में नवाचार को प्रोत्साहन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद, नियमित अध्ययन और व्यावहारिक अनुभवों के अवसरों को बढ़ावा देना आवश्यक है।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के राष्ट्रीय संकल्प की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की भावी प्रगति आज की युवा पीढ़ी के ज्ञान, कौशल, नवाचार और कर्मठता पर निर्भर करेगी। इसके लिए आधुनिक तकनीक में दक्ष होने के साथ-साथ युवाओं में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव भी होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से सफलता के लिए निरंतर परिश्रम, अनुशासन और धैर्य अपनाने तथा नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा सकारात्मक एवं रचनात्मक कार्यों में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहें, परिवार एवं समाज का सम्मान करें और अपने आचरण में नैतिकता बनाए रखें।

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