रांची / नई दिल्ली: झारखंड कैडर के 1999 बैच के निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को न्यायपालिका से एक बहुत बड़ी राहत मिली है। पिछले 13 महीनों से अधिक समय से जेल में बंद विनय चौबे की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई का आदेश जारी कर दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने कुछ कड़े दिशा-निर्देशों और शर्तों के साथ उन्हें नियमित जमानत दी है।
क्या है पूरा मामला?
विनय चौबे के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और अन्य जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसा था। उन पर मुख्य रूप से दो बड़े मामलों में शामिल होने का आरोप है:हजारीबाग जमीन घोटाला (Hazaribagh Land Scam): यह मामला उस समय का है जब वे हजारीबाग के उपायुक्त (DC) थे। आरोप है कि उन्होंने खासमहल और सेवायत (servitude) की सरकारी व वन भूमि के रिकॉर्ड में हेरफेर करके उसे अवैध रूप से निजी लोगों के नाम ट्रांसफर कर दिया था। इस मामले में कुल 73 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
झारखंड शराब घोटाला (Jharkhand Liquor Scam): उत्पाद विभाग के सचिव रहते हुए उन पर राज्य के राजस्व को करीब ₹38 करोड़ का नुकसान पहुँचाने और नियमों को ताक पर रखकर शराब सिंडिकेट को फायदा पहुँचाने का आरोप था। इस मामले में उन्हें मई 2025 में गिरफ्तार किया गया था।पहले के कानूनी झटके और सुप्रीम कोर्ट का रुखइससे पहले, झारखंड हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते उनके बाहर आने से गवाहों और सबूतों के प्रभावित होने का खतरा है। शराब घोटाले और आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में उन्हें पहले ही तकनीकी आधार (Default Bail) पर निचली अदालतों से राहत मिल चुकी थी, लेकिन हजारीबाग जमीन घोटाले की वजह से वह जेल से बाहर नहीं आ पा रहे थे। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले के कई अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और याचिकाकर्ता लंबे समय से हिरासत में है।
किन शर्तों पर मिली है जमानत?
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई के साथ निम्नलिखित शर्तें लागू की हैं:वे अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकते।वे इस मामले से जुड़े किसी भी गवाह या सबूत को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।उन्हें चल रही जांच में एजेंसियों का पूरा सहयोग करना होगा।
निष्कर्ष: कानूनी प्रक्रियाएं और कागजी औपचारिकताएं पूरी होते ही विनय कुमार चौबे बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल (होथवार) से बाहर आ जाएंगे। हालांकि, वह जेल से बाहर जरूर आ रहे हैं, लेकिन उनकी मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं क्योंकि उन पर लगे भ्रष्टाचार के मामलों की कानूनी सुनवाई और जांच जारी रहेगी।