रेलवे में ‘अफसरशाही’ की खुली गुंडागर्दी: टेंडर नियमों को पैरों तले रौंदा, ‘साहब’ के चहेतों को रेवड़ी बांटने के बड़े खेल का पर्दाफाश!
नई दिल्ली / धनबाद: भारतीय रेलवे में अधिकारियों की तानाशाही और सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाकर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। RTI एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता सर्वेश कुमार सिंह ने सीधे रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और रेल मंत्री को पत्र लिखकर रेलवे मुख्यालयों में MTS (मल्टी टास्किंग स्टाफ) और ‘बंगलो पीन’ (Bungalow Peon) की तैनाती में चल रहे एक बड़े नेक्सस का भंडाफोड़ किया है।
दूसरी ओर, धनबाद रेल मंडल में एक वेंडर (Norma Softech Pvt Ltd) ने सीनियर डिविजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (G) प्रशांत कुमार पर सीधे तौर पर ‘गुंडागर्दी’ करने, वैध सरकारी कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने की धमकी देने और अपने पसंदीदा लोग रखने का दबाव बनाने का गंभीर आरोप मढ़ दिया है।
“अधिकारियों के खातों में सीधे पैसे भेज दो” –
सिस्टम पर करारा तमाचारेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में आरटीआई कार्यकर्ता सर्वेश कुमार सिंह ने बेहद तीखा और आक्रामक रुख अपनाते हुए रेलवे की चयन प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा किया है:
चहेतों की अवैध भर्ती: रेलवे के बड़े दफ्तरों (GM/DRM/Headquarters) में बैठे अधिकारी नियमों के तहत एजेंसी द्वारा भेजे गए योग्य युवाओं को काम पर रखने के बजाय अपने पसंदीदा लोगों को पिछले दरवाजे से एंट्री दिला रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर खुला तंज: कार्यकर्ता ने सिस्टम पर सीधा प्रहार करते हुए लिखा है कि अगर इसी तरह अधिकारियों के दबाव में ही भर्तियां करनी हैं, तो सरकारी टेंडर प्रक्रिया का नाटक करने की नौटंकी क्यों की जा रही है? इससे बेहतर है कि सीधे अधिकारियों के बैंक खातों में ही पैसे ट्रांसफर कर दिए जाएं ताकि वे अपनी मनमर्जी चला सकें।
सख्त गाइडलाइन की मांग: उन्होंने रेल मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप करने और एक स्पेशल SOP (Standard Operating Procedure) जारी करने की मांग की है, ताकि वेंडर एजेंसी द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए योग्य मैनपावर के हक को न मारा जा सके।
धनबाद रेल मंडल में नई तानाशाही: “साहब बोले- मैं हाजीपुर से अपने आदमी लाया हूँ”
इस बीच, पूर्व मध्य रेलवे (East Central Railway) के धनबाद रेल मंडल से तो नियमों को पूरी तरह ठेंगा दिखाने का हैरान करने वाला वाकया सामने आया है। नोर्मा सोफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर ने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) धनबाद को लिखित शिकायत भेजी है:
CBI ट्रैपिंग के बाद आए नए साहब की मनमानी: पत्र के मुताबिक, पूर्व अधिकारी संजीव कुमार के सीबीआई (CBI) के शिकंजे में फंसने के बाद नए अधिकारी प्रशांत कुमार ने पद संभाला है, लेकिन आते ही उन्होंने मनमानी शुरू कर दी।वैलिड सरकारी कॉन्ट्रैक्ट की धज्जियां: शिकायतकर्ता के पास सरकारी पोर्टल का वैध ‘GeM कॉन्ट्रैक्ट’ (No-511687733828972) होने के बावजूद, जब वह 22 मई 2026 को तय नियमों के तहत मैनपावर लेकर दफ्तर पहुंचे, तो अधिकारी ने दो टूक कह दिया, “मैं अपने साथ हाजीपुर से आदमी लेकर आया हूँ, इन्हें नहीं रखूंगा।”
करियर तबाह करने की धमकी: जब ठेकेदार ने सरकारी नियमों का हवाला दिया, तो अधिकारी ने सीधे तौर पर उसका कॉन्ट्रैक्ट ही रद्द करने और ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दे डाली।
शिकायत दबाने का खेल: ‘साहब छोटे लोगों से नहीं मिलते’
पीड़ित वेंडर का आरोप है कि जब उन्होंने इस खुली मनमानी के खिलाफ DRM साहब से गुहार लगाने की कोशिश की, तो उनके निजी सहायक (PA) ने यह कहकर रास्ता रोक दिया कि “साहब कॉन्ट्रैक्टर से नहीं मिलते”। इसके बाद मुकेश सर नाम के एक अन्य अधिकारी के पास भेजने पर भी उन्होंने केवल ‘गोल-मोल’ जवाब देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।
अगले टेंडर में ‘साहब के आदमी’ की शर्त डालने की खुली चुनौती!
अधिकारियों की इस तानाशाही से आजिज आकर पीड़ित वेंडर ने रेलवे प्रशासन को चुनौती देते हुए तंज कसा है कि रेलवे को अपने अगले टेंडर की शर्तों (ATC) में पहले ही यह साफ लिख देना चाहिए कि “यहाँ केवल साहब के लाए हुए आदमियों को ही नौकरी पर रखा जाएगा”, ताकि भविष्य में कोई दूसरी ईमानदार एजेंसी इस धोखाधड़ी का शिकार न बने। इस पूरे मामले की कॉपियां रेल मंत्री (MR), रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और जनरल मैनेजर (GM) को भी भेजी गई हैं। अब देखना यह होगा कि ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाला रेल मंत्रालय इन बेलगाम अफसरों पर क्या हंटर चलाता है।