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भोजपुरी-मगही का विरोध: आदिवासी छात्र संघ ने दी झारखंड बंदी की चेतावनी, कहा— ‘बिहार की भाषाएं बर्दाश्त नहीं’

रांची: आदिवासी छात्र संघ (ACS) केंद्रीय समिति ने आज करमटोली स्थित आदिवासी छात्रावास पुस्तकालय में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। संघ ने दो टूक शब्दों में कहा कि भोजपुरी, मगही और अंगिका झारखंड राज्य की भाषाएं नहीं हैं। सरकार इन्हें जबरन यहां लागू करना बंद करे।

संवाददाता सम्मेलन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

झारखंड बंदी की चेतावनी: यदि राज्य सरकार इन बाहरी भाषाओं को मान्यता देती है, तो आदिवासी छात्र संघ पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर ‘झारखंड बंदी’ की घोषणा करेगा।

सभी वर्गों से सहयोग की अपील: संघ ने सामान्य (General), अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सहित समाज के सभी तबकों से इस बंदी को सफल बनाने का आग्रह किया है।

नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण लड़ाई: छात्र संघ ने साफ किया कि उनकी लड़ाई पुलिस-प्रशासन से नहीं, बल्कि सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ है। विरोध स्वरूप छात्र शांतिपूर्वक सांकेतिक गिरफ्तारी देंगे। इस दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

नौकरियों में अतिक्रमण का डर: संघ का मानना है कि इन भाषाओं को शामिल करने से JPSC और JTET जैसी परीक्षाओं में स्थानीय युवाओं के हक का अतिक्रमण होगा। जब झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं बिहार में लागू नहीं हैं, तो बिहार की भाषाएं झारखंड में क्यों लागू की जा रही हैं?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये रहे उपस्थित:
इस नीति के खिलाफ हर स्तर पर आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया गया। आज के इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुशील कुमार मिंज, जतरु उरांव, प्रो. सतीश भगत, सुरेश टोप्पो, रांची विश्वविद्यालय के ACS अध्यक्ष संजय महली, दिनेश भगत, मुकेश असुर, अनीश उरांव, रमेश उरांव, महावीर उरांव सहित विभिन्न आदिवासी हॉस्टलों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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