रांची:झारखंड की माटी में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण कई खिलाड़ी मुफलिसी में जीने को मजबूर हैं। इसी कड़ी में ओरमांझी ब्लॉक के चंदरा गांव की रहने वाली राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा की दयनीय स्थिति को उजागर करने के लिए वेटरन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ झारखंड ने एक सराहनीय पहल की है। संगठन द्वारा आज रांची प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जहां दिव्यानी लिंडा को सम्मानित करने के साथ-साथ उनकी गंभीर आर्थिक स्थिति को मीडिया के माध्यम से सरकार के समक्ष लाया गया।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार:
दिव्यानी लिंडा ने राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेलकर राज्य का नाम रोशन किया है, लेकिन उनका निजी जीवन बेहद संघर्षपूर्ण और अभावों से भरा है। घर की माली हालत इतनी दयनीय है कि दिव्यानी की मां को परिवार चलाने के लिए रेजा (दैनिक मजदूर) का काम करना पड़ता है। इतना ही नहीं, उनका भाई कमर से नीचे पूरी तरह दिव्यांग है और लंबे समय से बीमार चल रहा है। इस अत्यंत विषम परिस्थिति के बावजूद इस होनहार खिलाड़ी ने खेल के प्रति अपने जज्बे को मरने नहीं दिया, परंतु सरकार की नजर अब तक इस परिवार पर नहीं पड़ी है।
गांव में खेल मैदान की कमी:
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संगठन ने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल दिव्यानी तक सीमित नहीं है। उनके गांव चंदरा और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसी प्रतिभावान लड़कियां हैं, जिनमें खेल की अद्भुत काबिलियत है और वे आगे बढ़ना चाहती हैं। इन खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी बाधा अभ्यास के लिए एक अदद खेल मैदान का न होना है। उचित खेल मैदान और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इन ग्रामीण बच्चियों की प्रतिभा दम तोड़ रही है, जिससे राज्य एक बेहतर खेल भविष्य खो रहा है।
सरकार से मदद की गुहार:
वेटरन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ झारखंड ने सरकार से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने की जोरदार वकालत की है। संगठन के अध्यक्ष मुकेश कुमार, सचिव एमपी सिन्हा, कोषाध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद और प्रवक्ता संजीत सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से सरकार से गुहार लगाई है कि दिव्यानी लिंडा जैसे काबिल खिलाड़ियों को अविलंब आर्थिक सहायता और रोजगार मुहैया कराया जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में खेल के मैदान और ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाए ताकि झारखंड का नाम वैश्विक पटल पर चमकाने वाले खिलाड़ियों को अपनी गरीबी से न हारना पड़े।