Ranchi: महासप्तमी के दिन मां भगवती चिंतामणि और देवी नवपत्रिका मां को बांस के बने डोली में बैठा कर पूर्वाह्न 10:30 बजे पूरे रीति रिवाज, मंत्र उच्चारण, घंट, शंख, ढोल, नगाड़ा, शहनाई के साथ शोभ यात्रा ऐतिहासिक ठाकुर निवास बड़कागढ़ जगन्नाथपुर से प्राचीन देवी घर ले लाया गया।
मां की डोली बड़कागढ़ राज परिवार की बहुओं की साड़ियों से सजाया जाता हैं। १880 ई से यह परंपरा चली आ रही है।
स्थानिक ग्रामीण , रांची नगर निगम के कर्मचारी, मुस्लिम परिवार द्वारा मां के जाना वाले रस्ते को झाड़ू लगाया गया, साथ ही पानी से धोया गया। पूरा इलाका मां के जयकारे से गूंज उठा।
यह पूजा पूरे तांत्रिक पद्धति से की जाती हैं। प्राचीन देवी घर पहुंचने पर सर्व प्रथम मां भगवती नवपत्रिका की बाहरी पूजा अनुष्ठान की गई जहाँ मां को बकरे की बलि दी गई तपश्चात मां भगवती चिंतामणि और नवपत्रिका देवी की संयुक्त पूजा तांत्रिक पद्धति से प्रारंभ हुई जिसमें मां को पुनः बकरे की बलि दी गई। मां भगवती की सात आरती हुई।
पूरे बड़कागढ़ ईस्टेट राजपरिवार के साथ जगन्नाथपुर, आणि, भूसुर, लटमा, मौसीबाड़ी से लोग मां की पूजा दर्शन हेतु आये। उपरांत मां की मंगल आरती की गई, प्रसाद का वितरण किया गया।
इस पूजा आन्नी मौजा स्थित प्राचीन देवी घर में बडकागढ़ के पुरोहित पूजनीय श्री सदन गोपाल शर्मा ने पूजा अर्चना कराया।
इस पूजा के यजमान बडकागढ़ के ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव थे।
कल महा अष्टमी पूजा के दौरान महा हवन की जाती हैं, 1880ई से निमित होती हैं। हवन में चावल, जाऊ, तिल, गुड़, घी, मधु आदि सामग्री मिला कर बनाया गया है। तांत्रिक पद्धति से हवन होती हैं।
मंगल आरती की जाती हैं।
मां भगवती से कामना करते हैं कि मां सबका कल्याण करे।