रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने वोटर लिस्ट, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार एवं निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जननायक राहुल गांधी ने देश में संगठित तरीके से हो रही कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर जो सवाल उठाए थे, अब सामने आ रहे खुलासे उन्हीं आशंकाओं को सही साबित कर रहे हैं।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आज की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब चुनाव आयोग के भीतर ही फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की गई, तो फिर देश के मतदाताओं से सच्चाई क्यों छिपाई जा रही है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार जवाब दे, चुनाव आयोग जवाब दे और देश के वोट का पूरा हिसाब दे।
उन्होंने कहा, पहले इस तरह की इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी सरकारें हिला देती थीं। मगर आज पूरा सिस्टम जिस तरह कब्जे में कर लिया गया है, उससे सरकार बड़े से बड़े मामले को दबा देती है।
आलोक दूबे ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने बिहार चुनाव से ठीक पहले जिन बड़े खुलासों को ‘हाइड्रोजन बम’ बताया था, आज सामने आ रही जानकारी उन दावों को और गंभीर बनाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में SIR शुरू करने के बाद इसे पूरे देश में इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग के भीतर से ही उठी आपत्तियों ने पूरे मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। जिस चुनाव आयोग पर निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी है, अगर उसी व्यवस्था में जनता के मताधिकार पर सवाल उठने लगें, तो यह केवल चुनावी लड़ाई नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है।
आलोक कुमार दूबे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर एकतरफा तरीके से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को संधू और जोशी द्वारा Form 6 में बदलाव को लेकर लिखित आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद उसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि मई 2026 में भी दो चुनाव आयुक्तों की ओर से गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। आरोप है कि सैकड़ों ERO अपने ही पोर्टल तक पहुंच नहीं बना पा रहे थे क्योंकि आयोग के IT विभाग ने उनकी पहुंच सीमित कर दी थी। आलोक दूबे ने इसे शर्मनाक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता विलोपन के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 38 लाख नाम हटाए जाने के बाद बहुत कम अपीलें दायर हुईं और जिन मामलों में अपील हुई, उनमें बड़ी संख्या में मतदाताओं को गलत तरीके से हटाया गया पाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया इतनी त्रुटिपूर्ण है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
आलोक दूबे ने कहा कि एक तरफ नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित करने वाले फैसले लिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग द्वारा बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अपील किए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
उन्होंने कहा, लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है—एक व्यक्ति, एक वोट। लेकिन यदि किसी व्यक्ति के नाम पर कई वोट और किसी वास्तविक मतदाता का नाम ही सूची से गायब हो जाए, तो यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की जीत की कथित बेचैनी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जहां चुनावी हार का खतरा दिखाई देता है, वहां दल-बदल से लेकर राजनीतिक दबाव तक के आरोप सामने आते हैं। उन्होंने एक पुराने मामले का हवाला देते हुए कहा कि 2007 की FIR के आधार पर उपचुनाव के एक कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी जैसे घटनाक्रम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर चिंता पैदा करते हैं।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि यदि मतदाता सूची से करोड़ों लोगों के नाम प्रभावित होते हैं, तो आने वाली पीढ़ियों के उन युवाओं पर भी इसका असर पड़ेगा जो 2025, 2026 या 2027 में 18 वर्ष की आयु पूरी कर पहली बार मतदान के अधिकार के लिए आवेदन करेंगे।
उन्होंने कहा, वोट पर डाका, लोकतंत्र पर हमला अब चुप्पी से नहीं चलेगा। देश के हर नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि उसके वोट के साथ क्या हुआ। चुनाव आयोग को पारदर्शिता के साथ सभी आपत्तियों, फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए।
आलोक दूबे ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता से बड़ा संविधान और किसी भी राजनीतिक दल से बड़ा जनता का मताधिकार है। देश के वोट की रक्षा करना हर लोकतांत्रिक नागरिक की जिम्मेदारी है और कांग्रेस इस लड़ाई को मजबूती से जारी रखेगी।