वाराणसी में ₹30 लाख का इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू एनकाउंटर में ढेर; भाई ने यूपी पुलिस पर लगाया फर्जी मुठभेड़ का आरोप
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रविवार तड़के एक सनसनीखेज घटनाक्रम में यूपी एटीएस (ATS) ने झारखंड के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन ‘तृतीय प्रस्तुति कमेटी’ (TPC) के सुप्रीमो और मुख्य नक्सली कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को एक कथित मुठभेड़ में मार गिराया। बृजेश गंझू पर एनआईए (NIA) द्वारा 5 लाख और झारखंड सरकार द्वारा 25 लाख रुपये समेत कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह पिछले दो दशकों से पुलिस की गिरफ्त से दूर था और उस पर हत्या, रंगदारी, टेरर फंडिंग और यूएपीए (UAPA) के तहत 40 से अधिक गंभीर मामले दर्ज थे।
एटीएस की जवाबी कार्रवाई और एनकाउंटर का विवरण
एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश के अनुसार, 20 सितंबर 2026 को सुबह लगभग 4:00 से 5:00 बजे के बीच यूपी एटीएस को गोपनीय सूचना मिली थी कि बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र से होते हुए मुगलसराय की ओर भागने की फिराक में है। सूचना के आधार पर एटीएस और स्थानीय पुलिस की टीम ने रामनगर के लंका मैदान (टेंगरा मोड़ के पास) घेराबंदी की।
पुलिस अधिकारियों ने जब संदिग्ध मोटरसाइकिल को रुकने का इशारा किया, तो आत्मसमर्पण करने के बजाय बृजेश ने बाइक से उतरकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोलियां लगीं, जिससे वे बाल-बाल बच गए। पुलिस द्वारा की गई आत्मरक्षार्थ और जवाबी फायरिंग में बृजेश गंझू गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में सफल रहा। घायल अवस्था में बृजेश को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से पुलिस को दो पिस्तौल, जिंदा कारतूस और खोखे बरामद हुए हैं।
परिवार का पलटवार: भाई ने लगाए गंभीर आरोप
इस मुठभेड़ के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बृजेश गंझू के भाई और परिजनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस की इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सुनियोजित ‘फर्जी एनकाउंटर’ (Fake Encounter) करार दिया है। मृतक के भाई का आरोप है कि पुलिस ने बृजेश को पहले ही कहीं और से हिरासत में ले लिया था और उसके बाद वाराणसी लाकर सुनियोजित तरीके से उसकी हत्या कर दी गई।
परिजनों का कहना है कि बृजेश लंबे समय से राजनीति और सामाजिक जीवन की मुख्यधारा में आने की कोशिश कर रहा था और वह 2010 में निर्विरोध मुखिया भी चुना गया था। भाई ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) या सीबीआई (CBI) से जांच कराने की मांग की है ताकि कथित मुठभेड़ की सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। फिलहाल, यूपी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां परिजनों के इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे एक बड़ी और वैध सफलता मान रही हैं और फरार साथी की तलाश में जुटी हुई हैं।