मैया सम्मान का मज़ाक: रांची में विधवा महिला की दुकान पर दबंगों का तांडव, SSP को गुहार के बाद भी न्याय की आस में भटक रही मां-बेटी
रांची (चान्हो): झारखंड सरकार की ‘मैया सम्मान’ और ‘विधवा सम्मान’ योजनाएं जहां एक तरफ महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का दावा कर रही हैं, वहीं रांची जिले के चान्हो बाजार टांड से आया एक मामला इन दावों की पोल खोल रहा है। यहां एक लाचार विधवा महिला और उसकी अविवाहित बेटियों की आजीविका को जबरन छीनने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। बीते दिन भी कुछ दबंगों ने महिला की दुकान पर पहुंचकर सरेआम अभद्र और बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत देने के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक कोई सुरक्षा या राहत नहीं मिली है।
दुकान हड़पने की नीयत, विरोध करने पर इज्जत लूटने की धमकी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम ओपा की रहने वाली विधवा महिला लक्ष्मी मसोमात (पति- स्व. छोटू साहू) चान्हो बाजार टांड में सड़क किनारे खाने-पीने का स्टॉल लगाकर अपने पूरे परिवार का पेट पालती हैं। पीड़िता का आरोप है कि गांव के कुछ रसूखदार लोगों शह पर जितेंद्र साहू (पिता- स्व. शिवा साहू) उनकी दुकान को पूरी तरह से बंद कराने या हड़पने की नीयत से परेशान कर रहा है।
आस-पास पर्याप्त जगह होने के बावजूद पीड़िता की दुकान के ठीक आगे जबरन गुमटी और दूसरा स्टॉल खड़ा कर दिया गया है ताकि उनकी दुकान छिप जाए। जब महिला और उनकी बेटियों ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने न सिर्फ उनकी दुकान का सामान सड़क पर फेंक दिया, बल्कि मां-बेटी को गंदी-गंदी गालियां देते हुए उनकी इज्जत पर हाथ डालने की धमकी भी दी।
थाने में नहीं हुई सुनवाई, SSP के पास आवेदन भी बेअसर
पीड़िता ने इस प्रताड़ना की शिकायत सबसे पहले स्थानीय चान्हो थाना प्रभारी से की थी। आरोप है कि पुलिस ने मदद करने के बजाय पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और किसी लालच में आकर दबंगों का ही साथ दिया। स्थानीय स्तर पर न्याय न मिलता देख पीड़िता ने सीधे एसएसपी (SSP), रांची के कार्यालय में जाकर लिखित आवेदन सौंपा था, जिस पर कार्रवाई का आश्वासन भी मिला था। लेकिन हकीकत यह है कि इस शिकायत के बाद भी आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे लगातार दुकान पर आकर महिला और उसकी बेटियों को प्रताड़ित कर रहे हैं।
सरकारी योजनाओं का मज़ाक और सामाजिक कार्यकर्ताओं की चुप्पी
यह घटना सीधे तौर पर राज्य में चल रही महिला सुरक्षा और सम्मान की योजनाओं पर एक बड़ा तमाचा है। एक तरफ सरकार मंचों से नारी सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्वाभिमान से जी रही एक विधवा महिला की आजीविका को सरेआम उजाड़ा जा रहा है।
इस संवेदनशील मामले पर इलाके के तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। आपसी विवाद को सुलझाने या एक बेसहारा परिवार को न्याय दिलाने के लिए अब तक कोई भी आगे नहीं आया है। भय और दहशत के माहौल में जी रहा यह परिवार आज प्रशासन से हाथ जोड़कर सिर्फ अपने जीने के अधिकार और न्याय की भीख मांग रहा है।


