नई दिल्ली: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव पर दिल्ली का मावलंकर हॉल राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस समारोह में न केवल इतिहास को याद किया गया, बल्कि नई पीढ़ी को वीरता के आदर्शों से जोड़ने का संकल्प भी लिया गया।
इतिहास और शौर्य का मिलन
समारोह के मुख्य अतिथि मेवाड़ राजघराने के महाराज कुमार श्री लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ रहे। महाराणा प्रताप के वंशज को अपने बीच पाकर सभा में उत्साह दोगुना हो गया। अपने संबोधन में उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह के अदम्य साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि 80 वर्ष की आयु में जो रणकौशल कुंवर सिंह जी ने दिखाया, वह विश्व इतिहास में विरल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे महानायकों की गाथाएं ही आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक हैं।
साहित्यिक धरोहर का विमोचन
इस अवसर पर इतिहास के एक अनछुए पहलू को दुनिया के सामने लाने के लिए पूर्व जज श्री शारंधर सिंह परिहार द्वारा लिखित शोधपरक ऐतिहासिक पुस्तक का विमोचन हुआ। यह पुस्तक प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह जी के गहन योगदान पर आधारित है। पुस्तक का विमोचन बांका (बिहार) की पूर्व सांसद श्रीमती पुतुल कुमारी ने किया। उन्होंने लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास को सही तथ्यों के साथ सहेजना समय की मांग है।
अतिथियों का सम्मान और आभार
कार्यक्रम की शुरुआत फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री निर्मल सिंह के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अतिथियों का अभिनंदन करते हुए फाउंडेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। समारोह के अंत में “रक्षक” धरोहर संरक्षण एवं इतिहास शोध केंद्र के संयोजक श्री जितेंद्र नारायण सिंह ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।