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राँची में लापता होते बच्चे और बेबस खाकी: संसाधनों की कमी से जूझती पुलिस

राँची: झारखंड की राजधानी राँची और इसके आस-पास के इलाकों से मासूम बच्चों के लापता होने के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने जहाँ एक तरफ आम जनता और पीड़ित परिवारों को खौफजदा कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ यह स्थिति राँची पुलिस प्रशासन के लिए भी संसाधनों और कार्यप्रणाली की एक कड़ी परीक्षा साबित हो रही है। जमीनी स्तर पर जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि तकनीकी बुनियादी ढांचे और हाई-टेक सर्विलांस नेटवर्क की कमी के कारण शुरुआती तफ्तीश में भारी अड़चनें आती हैं।

शहर के अधिकांश रिहायशी और बाहरी ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कैमरे उपलब्ध नहीं हैं और जहाँ कैमरे लगे भी हैं, वहाँ रख-रखाव के अभाव में वे बंद पड़े रहते हैं, जिससे अपराधियों के भागने का रूट मैप तैयार करना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा, राँची की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसकी सीमाएँ बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों से बेहद करीब से सटी हुई हैं, जिसका सीधा फायदा उठाकर अंतर-राज्यीय मानव तस्करी में शामिल शातिर गिरोह बच्चों को अगवा करने के चंद घंटों के भीतर ही राज्य की सीमा से बाहर निकाल देते हैं।

इस पूरी व्यवस्था में पुलिस बल के पास मैनपावर का भारी संकट भी एक बड़ी रुकावट है, क्योंकि थानों में तैनात सीमित पुलिसकर्मियों को एक ही समय में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी संभालने और कोर्ट-कचहरी की तारीखें भुगतने के साथ-साथ दर्जनों गंभीर मामलों की केस डायरियों पर भी काम करना पड़ता है। इस प्रशासनिक दबाव के बीच एक व्यावहारिक समस्या यह भी सामने आती है कि ग्रामीण और स्लम क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव के कारण परिजन बच्चा गायब होने के 24 से 48 घंटे बाद पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचते हैं।

परिणामस्वरूप, जांच के शुरुआती सबसे महत्वपूर्ण घंटे, जिन्हें तकनीकी भाषा में ‘गोल्डन आवर्स’ कहा जाता है, हाथ से निकल जाते हैं और तब तक अपराधी अपना ठिकाना बदल चुके होते हैं। इन तमाम गंभीर चुनौतियों और चौतरफा आलोचनाओं के बीच राँची पुलिस ने हाल ही में आधुनिक तकनीकी सर्विलांस, सेल-टावर डंप डेटा और अंतर-राज्यीय समन्वय का एक मजबूत जाल बिछाकर कई शानदार और त्वरित सफलताएँ भी हासिल की हैं।

हाल ही में जगरनाथपुर और तुपुदाना के इलाकों से अचानक गायब हुए दो भाई-बहन के मामले में राँची सिटी एसपी के नेतृत्व वाली टीम ने तत्परता दिखाते हुए महज 48 घंटों के भीतर साइबर सेल की मदद से बच्चों को तुपुदाना के ही चांद गांव स्थित एक परिसर से सकुशल बरामद कर उनके माता-पिता को सौंप दिया था। वहीं दूसरी तरफ, धुर्वा इलाके से दो मासूम बच्चों के अचानक गायब होने की घटना के बाद एसएसपी के निर्देश पर तुरंत एक विशाल 40 सदस्यीय विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया, जिसने अपराधियों का पीछा करने के लिए देश के करीब 12 राज्यों में सघन छापेमारी अभियान चलाया।

इस बड़े ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने न केवल सैकड़ों वाहनों के डेटा को खंगाला बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों की चुप्पी तोड़ने के लिए आर्थिक इनाम की नीति का भी सहारा लिया, जिसके तहत हटिया डीएसपी द्वारा धुर्वा मामले में 50 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की गई, जबकि खोरहा कॉलोनी से लापता एक अन्य 18 महीने की बच्ची के सुराग के लिए इनाम राशि को एक लाख से बढ़ाकर सीधे ढाई लाख रुपये कर दिया गया। इस मजबूत इनामी नेटवर्क और मुखबिरों से मिली सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर राँची पुलिस की एसआईटी ने पड़ोसी जिले रामगढ़ के चितरपुर में स्थित एक सुनसान गोदाम पर रात के अंधेरे में तगड़ी छापेमारी की और वहां से धुर्वा के दोनों बच्चों को बिल्कुल सुरक्षित छुड़ा लिया।

इस बेहद सफल और रणनीतिक ऑपरेशन के दौरान मौके से बिहार के औरंगाबाद जिले के दो कुख्यात तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी निशानदेही पर उसी गुप्त ठिकाने से राज्य के अलग-अलग हिस्सों से अगवा किए गए 12 अन्य बच्चों को भी गुलामी के दलदल में जाने से पहले मुक्त करा लिया गया, जिससे एक बहुत बड़े अंतर-राज्यीय मानव तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। इसी कड़ी में तकनीकी कड़ियों को ओडिशा से जोड़ते हुए राँची पुलिस की एक और विशेष टीम वर्तमान में पुरी में स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर रेड कर रही है ताकि लापता बच्चों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

हालांकि इन हालिया सफलताओं ने पुलिस के मनोबल को जरूर बढ़ाया है और पीड़ित परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस संगठित अपराध की जड़ें बहुत गहरी हैं। जब तक राँची के हर संवेदनशील चौराहे पर ‘फेस रिकग्निशन’ यानी चेहरा पहचानने वाले आधुनिक कैमरे नहीं लगाए जाते और थानों को पूरी तरह हाई-टेक संसाधनों से लैस नहीं किया जाता, तब तक मासूमों की सुरक्षा की यह बड़ी जंग खाकी के लिए हर दिन एक नई चुनौती बनी रहेगी।

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