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Opinion

पंजाब केसरी लाला लाजपत राय ( (जन्मदिवस, 28 जनवरी पर विशेष)

प्रारम्भिक जीवन                                     भारत की आजादी के आन्दोलन के प्रखर नेता लालालाजपत राय का नाम ही देशवासियों में स्फूर्ति तथा प्रेरणा का संचार कराता है। अपने देश, धर्म तथा संस्कृति के लिए उनमें जो प्रबल प्रेम तथा आदर…

रांची की शाम और शराब का मायाजाल: क्या आपकी खुशी सच में जाम के साथ है?

झारखंड की राजधानी रांची, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत आबोहवा के लिए जाना जाता है, आज एक गंभीर समस्या की चपेट में है। शाम ढलते ही यहाँ के मोराबादी मैदान से लेकर कडरू और रातू रोड की गलियों तक, शराब की दुकानों पर उमड़ती भीड़ यह सोचने पर…

न्याय की संधि के रूप में भारतीय संविधान 

वर्ष 1947 केवल एक गणराज्य के जन्म का प्रतीक नहीं था; उसने उस नैतिक और राजनीतिक संधि को भी चिह्नित किया जिसे एक ऐसे समाज ने स्वीकार किया था जिसने औपनिवेशिक शासन का डोला और विभाजन की त्रासदी से जीवित निकलकर आगे बढ़ा। भारतीय मुसलमानों के लिए,…

एक उपन्यास जो धार्मिक कट्टरता की आलोचना करता है

मोहसिन खान वर उर्दू उपन्यास 'अल्लाह मियाँ का कारख़ाना' कठोर धार्मिक कट्टरत , सामाजिक अन्याय और पारिवारिक उपेक्षा के बीच कुचले जाते एक मासूम बच्चे की मार्मिक कथा प्रस्तुत करता है। उपन्यास का केंद्र जिब्राल है, जो एक अत्यंत रुढ़िवादी और…

जिहाद और जिहाद की सही समझ जलता हुआ रेगिस्तान या नग्न सत्य की…(भाग-1 )

हालांकि जिहाद लंबे समय से मीडिया में एक स्थायी विषय रहा है और हर किसी के लिए चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन बीते एक सप्ताह में यह विषय सामान्य से कहीं अधिक तीव्रता के साथ बहस में आ गया। ऐसा शोर-शराबा मचा कि मानो हर किसी को इस पर कुछ न…

आत्मघाती हमलों की वास्तविकता 

आत्महत्या हराम आत्महत्या क्या है? क्या यह पाप है, अपराध है, या नहीं? यदि कोई इस पर अलग राय रखता हो, तो भी इस्लाम और मुसलमानों में इस बात पर कभी कोई मतभेद नहीं रहा कि यह हराम है, इसका करना एक बड़ा गुनाह है, और यह बुरा कर्म इंसान को हमेशा…

भारत में ऑनलाइन इस्लामी उग्रवाद के विरुद्ध प्रौद्योगिकी और समुदाय 

  ऑनलाइन इस्लामी उग्रवाद का बढ़ना भारत की सामाजिक एकता और आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बढ़ती हुई चिंता का विषय है। जैसे-जैसे डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ रही है और सोशल मीडिया संचार का प्रमुख माध्यम बन गया है, चरमपंथी समूह इन प्लेटफॉर्मों का उपयोग…

वह दृष्टि जिसने राष्ट्र का निर्माण किया

भारत की एकता के पीछे लौह इच्छाशक्ति जब 1947 में भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, तब तिरंगा देशभर में लहराया, लेकिन “एक भारत” का विचार अभी भी नाजुक था। उपमहाद्वीप कई हिस्सों में बँटा हुआ था—एक ओर ब्रिटिश भारत और दूसरी ओर 560 से अधिक…

प्रतिक्रिया से पहले सच जानना ज़रूरी है

मानव समाज में जानकारी और संचार का महत्व हमेशा से रहा है। जब कोई घटना घटती है तो लोग उसके बारे में सुनते हैं, पढ़ते हैं और तुरंत अपनी राय बना लेते हैं। लेकिन आज के समय में जब सूचना का प्रसार सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से…

Sangh@100 with people’s support

The work of the Rashtriya Swayamsevak Sangh has now completed one hundred years. In this long journey, countless people have been companions, contributors, and well-wishers. This journey was full of hard work and challenges, but the…