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ऊर्जा विभाग की “गुप्त नियमावली” पर श्रमिक संघ का तीखा हमला, हजारों आउटसोर्सिंग कर्मियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं — अजय राय

Ranchi: विधानसभा सत्र के दौरान हुई चर्चा के उपरांत यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य के ऊर्जा विभाग द्वारा बहाली एवं सेवा शर्तों से संबंधित एक नई नियमावली तैयार कर ली गई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के खिलाफ है और हजारों आउटसोर्सिंग कर्मियों के भविष्य के साथ सीधा अन्याय है।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्षों से अपनी मेहनत और अनुभव के बल पर ऊर्जा विभाग की रीढ़ बने हुए तकनीकी एवं गैर-तकनीकी आउटसोर्सिंग कर्मियों को नजरअंदाज करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह सरकार की श्रमिक विरोधी मानसिकता को भी उजागर करता है।

अजय राय ने आरोप लगाया कि यदि नियमावली को छिपाकर लागू करने की कोशिश की गई, तो यह हजारों परिवारों की आजीविका छीनने की साजिश के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन कर्मियों ने विभाग को खड़ा रखने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी, आज उन्हीं के अधिकारों को दरकिनार करने का प्रयास किया जा रहा है, जो बिल्कुल अस्वीकार्य है।

संघ की स्पष्ट और कड़ी मांगें:

नई नियमावली को तत्काल सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा इसे “गुप्त और मनमानी नीति” माना जाएगा।

वर्षों से कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए समायोजन/विनियोजन (रेगुलराइजेशन) का स्पष्ट और बाध्यकारी प्रावधान किया जाए।

किसी भी नई बहाली प्रक्रिया में वर्तमान कर्मियों को प्राथमिकता देना अनिवार्य किया जाए।

सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन एवं सभी वैधानिक लाभों की गारंटी दी जाए।

बिना स्पष्ट नीति के किसी भी कर्मी को हटाने या बाहर करने की कोशिश तत्काल रोकी जाए।

अजय राय ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही सरकार और ऊर्जा विभाग ने अपनी मंशा स्पष्ट नहीं की और कर्मचारियों के हितों की रक्षा नहीं की, तो झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ राज्यव्यापी उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और सरकार की होगी।
अंत में उन्होंने कहा कि “यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की है — और इसे हर हाल में लड़ा जाएगा।

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