एचईसी प्रबंधन ने टेके घुटने: भारी संघर्ष के बाद हटिया मजदूर यूनियन (सीटू) और मजदूर लोक मंच को मिली मान्यता
रांची: भारी उद्योग निगम (HEC) के गलियारों में लंबे समय से चल रहा यूनियन की मान्यता का विवाद अंततः समाप्त हो गया है। एचईसी प्रबंधन ने भारी दबाव और कानूनी संघर्ष के बाद ‘हटिया मजदूर यूनियन’ (सीटू) और ‘मजदूर लोक मंच’ को आधिकारिक मान्यता दे दी है।
सत्ता और प्रतिद्वंद्वी यूनियनों के ‘दुरुपयोग’ पर सीटू की जीत
मान्यता मिलने के बाद हटिया मजदूर यूनियन (सीटू) के अध्यक्ष भवन सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विपक्षी यूनियनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मान्यता तो बहुत पहले ही मिल जाती, लेकिन भाजपा नीति समर्थित भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने सीटू यूनियन को मान्यता न मिले, इसके लिए सरकारी तंत्र का जमकर दुरुपयोग किया और प्रबंधन पर काफी दबाव डाला।”
वारंट जारी होने पर झुका प्रबंधन
भवन सिंह ने खुलासा किया कि प्रबंधन यह कदम उठाने को तैयार नहीं था, लेकिन कानूनी शिकंजे ने उन्हें मजबूर कर दिया। उन्होंने बताया, “जब यूनियन ने प्रबंधन पर वारंट निकलवाया, तब प्रबंधन की टीम के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा और उन्होंने दोनों यूनियनों को मान्यता का पत्र थमा दिया।”
एटक और बीएमएस की ‘लामबंदी’ हुई विफल
सीटू अध्यक्ष ने अन्य श्रमिक संगठनों की भूमिका पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि एटक (AITUC) ने भी बीएमएस के साथ मिलकर सीटू के खिलाफ लामबंदी की थी। उन्होंने कहा, “सबका प्रयास बेकार साबित हुआ। एक यूनियन ने तो यहां तक दावा किया था कि उन्होंने चेयरमैन से बोल दिया है कि मान्यता नहीं देनी है, लेकिन आज सबकी हेकड़ी पस्त हो गई है।”
मजदूरों के हक और एचईसी बचाने का संकल्प
वर्तमान प्रबंधन को पत्र जारी करने के लिए धन्यवाद देते हुए भवन सिंह ने एचईसी के तमाम मजदूरों को बधाई दी। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “हम एचईसी के तमाम मजदूरों के हकों की रक्षा करने और संस्थान को बचाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे।”