यूजीसी विनियम 2026 पर सरकार का जवाब फिर ‘विचाराधीन’, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा—इन नियमों पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया जा रहा?
नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विनियम, 2026 को लेकर आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामला W.P. (C) No. 508/2026, प्रशांत कुमार बनाम भारत संघ एवं अन्य आज सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट संख्या-1 में आइटम नंबर 39 के रूप में सूचीबद्ध था।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने एक बार फिर न्यायालय को बताया कि सरकार यूजीसी विनियम, 2026 के विषय पर अभी भी विचार कर रही है।
इस पर भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सवाल उठाया कि सरकार इन यूजीसी विनियमों पर पुनर्विचार क्यों नहीं कर रही है?
सरकार की ओर से लगातार मामले को विचाराधीन बताए जाने के बीच न्यायालय की यह टिप्पणी इस विषय पर पुनर्विचार और स्पष्टता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
इस मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संजीव राजपूत ने यूजीसी विनियमों से जुड़े संवैधानिक एवं कानूनी पहलुओं पर न्यायिक विचार की मांग की है।
इस प्रकरण का व्यापक महत्व उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, निष्पक्षता, सामाजिक सद्भाव तथा सभी विद्यार्थियों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा से जुड़ा है।
हमारा स्पष्ट मत है कि किसी भी भेदभाव-विरोधी व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को संरक्षण देना होना चाहिए, साथ ही उसके क्रियान्वयन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।