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झारखंड राज्य सूचना आयोग को आखिर कब मिलेगा पूर्ण अस्तित्व ?

यदि सरकार की मंशा वास्तव में सूचना के अधिकार कानून को प्रभावी बनाने और आम जनता को न्याय दिलाने की होती, तो झारखंड राज्य सूचना आयोग को पाँच वर्ष पूर्व ही सक्रिय किया जा सकता था। लेकिन नेता प्रतिपक्ष के अभाव का हवाला देकर वर्षों तक नियुक्ति प्रक्रिया बाधित रही। न्यायालय के समक्ष भी यह तर्क दिया गया कि नेता प्रतिपक्ष के अभाव में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संभव नहीं है और उनके चयन के बाद आयोग को तत्काल सक्रिय कर दिया जाएगा।

लेकिन नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के बाद भी डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी आयोग पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। सवाल यह है कि क्या चयन समिति और सरकार को यह जानकारी नहीं थी कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के बिना आयोग प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पाएगा ? यदि यह जानकारी थी, तो केवल सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करके मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त क्यों छोड़ दिया गया ?

माननीय राज्यपाल महोदय ने भी अपने मंतव्य में सरकार से शीघ्र मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति करने की अपेक्षा व्यक्त की थी, ताकि आम नागरिकों को न्याय मिल सके और वर्षों से लंबित द्वितीय अपीलों एवं शिकायतों का निपटारा हो सके। इसके बावजूद नियुक्ति में हो रही देरी गंभीर सवाल खड़े करती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए गठित आयोग ही निष्क्रिय पड़ा हो, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे ?

सूचना का अधिकार केवल कागजों पर लिखा कानून नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र की आत्मा है।

आयोग के निष्क्रिय रहने से उन हजारों नागरिकों के अधिकार प्रभावित होते हैं, जो वर्षों से अपनी अपीलों और शिकायतों के निपटारे की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण भी यदि प्रभावी आदेश नहीं हो पा रहा है, तो आम नागरिकों की प्रतीक्षा और पीड़ा लगातार बढ़ती जा रही है।

अब समय आ गया है कि सरकार इस गंभीर विषय पर तत्काल निर्णय ले, मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति करे और झारखंड राज्य सूचना आयोग को पूर्ण रूप से सक्रिय बनाए।

आखिर कब तक आम जनता अपने ही संवैधानिक अधिकारों के लिए इंतजार करती रहेगी ? कब तक सूचना के अधिकार का लाभ पाने के लिए नागरिकों को वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी ?

जनता को आश्वासन नहीं, अधिकारों का वास्तविक लाभ चाहिए।

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