रांची: विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह समारोह-2026 के अवसर पर केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी), रांची के मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्य विभाग ने भारतीय व्यावसायिक सामाजिक कार्य सोसायटी (आईएसपीएसडब्ल्यू) के सहयोग से शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता (Psychological First Aid) विषय पर एक ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया। इसमें मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े लगभग 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सीआईपी के निदेशक डॉ. विजय कुमार चौधरी ने किया। उन्होंने चर्चा की शुरुआत करते हुए किशोरों में मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल अस्पतालों में उपचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि घर और समुदाय के स्तर पर भी व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। परिवार का सहयोग, अभिभावकों की जागरूकता और बच्चों के साथ बेहतर संवाद इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. चौधरी ने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर वेबिनार आयोजित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानसिक संकट से गुजर रहे व्यक्ति को समय पर भावनात्मक सहयोग और उचित मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है। इसके लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को बुनियादी सहायता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
वेबिनार के मुख्य वक्ता डॉ. भूपेंद्र सिंह, प्रोफेसर, मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्य, मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, पीजीआईएमएस, रोहतक, हरियाणा ने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता ऐसी मानवीय और व्यावहारिक मदद है, जो किसी संकट, दुर्घटना, आपदा, तनावपूर्ण घटना या भावनात्मक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति को दी जा सकती है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को सुरक्षित महसूस कराना, उसकी बात सुनना, उसकी भावनात्मक जरूरतों को समझना और आवश्यक सहायता से जोड़ना है।
डॉ. सिंह ने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता के तीन प्रमुख चरणों—देखें (Look), सुनें (Listen) और जोड़ें (Link)—के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि ‘देखें’ के अंतर्गत व्यक्ति की स्थिति, सुरक्षा और तत्काल जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए। ‘सुनें’ का अर्थ है संवेदनशीलता और धैर्य के साथ उसकी बात सुनना, बिना किसी तरह का निर्णय दिए उसकी भावनाओं को समझना। वहीं, ‘जोड़ें’ के अंतर्गत व्यक्ति को उसके परिवार, समुदाय, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सहायता संसाधनों से जोड़ना शामिल है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संकट के समय किसी व्यक्ति की मदद करने के लिए हमेशा विशेषज्ञ होना जरूरी नहीं है। संवेदनशील व्यवहार, धैर्यपूर्वक सुनना और सही सहायता तक पहुंच बनाने में सहयोग देना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, गंभीर मानसिक संकट की स्थिति में व्यक्ति को प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों या संबंधित सेवाओं तक पहुंचाना आवश्यक है।
वेबिनार का संचालन सीआईपी के मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्य विभाग के मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्य ट्यूटर श्री अत्ताउल्लाह ने किया। कार्यक्रम में आईएसपीएसडब्ल्यू के अध्यक्ष श्री रवि किशन झा, सीआईपी के मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्य विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं प्रभारी डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, वरिष्ठ मनोचिकित्सकीय सामाजिक कल्याण अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और विषय से संबंधित अपने प्रश्न, अनुभव तथा विचार साझा किए। इस सत्र के माध्यम से मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता के व्यावहारिक उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में इसकी भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई।
वेबिनार का मुख्य संदेश यह रहा कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता केवल अस्पतालों और विशेषज्ञों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। परिवार, समुदाय और समाज के प्रत्येक व्यक्ति की संवेदनशील भागीदारी से संकट के समय जरूरतमंद लोगों को समय पर सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है।