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चुनाव आयोग ने आंतरिक चर्चाओं का बचाव किया, पूर्ण पारदर्शिता और साइबर सुरक्षा अखंडता का भरोसा दिया

नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशिष्ट आंतरिक टिप्पणियों और नोट्स को उजागर करने वाली रिपोर्टों के बीच अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हुए एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि आंतरिक नियंत्रण और संतुलन (चेक्स एंड बैलेंसेज), अलग-अलग दृष्टिकोण और तकनीकी सुझाव मानक प्रशासनिक प्रथाएं हैं, जिन्हें पूर्ण पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और परिचालन कठोरता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

आंतरिक टिप्पणियां स्वस्थ चर्चा का हिस्सा

10 महीने की अवधि में फैले कुछ विशिष्ट आंतरिक नोट्स और टिप्पणियों को चुनिंदा रूप से पेश किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, चुनाव आयोग ने कहा कि इस तरह की बातें उसकी कार्यप्रणाली की केवल एक आंशिक तस्वीर पेश करती हैं। संवैधानिक निकाय ने स्पष्ट किया कि मसौदा (ड्राफ्ट) चरणों के दौरान सदस्यों द्वारा उठाए गए अलग-अलग विचार और सुझाव, अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा हैं।

उप निदेशक पी. पवन द्वारा जारी बयान के अनुसार, न केवल तीनों कमिश्नर, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी प्रणाली में सुधार के लिए अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है। आयोग ने रेखांकित किया कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी प्रमुख निर्णय—जिसमें लगभग 40 नई पहलों की शुरुआत, चुनावी सुधार और देश भर में मतदाता सूची का पुनरीक्षण (एसआईआर सहित) शामिल हैं—पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम थे।

मजबूत साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और कानूनी अनुपालन

डिजिटल बुनियादी ढांचे को लेकर चिंताओं को संबोधित करते हुए, चुनाव आयोग ने पुष्टि की कि ईसीआईनेट (ECINet) सहित उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। अनधिकृत छेड़छाड़ या हेरफेर को रोकने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस में मानक साइबर सुरक्षा उपाय, आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण नियमित रूप से लागू किए जाते हैं।

आयोग ने दोहराया कि सभी आधिकारिक आदेशों और प्रशासनिक निर्देशों को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 के तहत पूर्ण कानूनी मंजूरी प्राप्त है। इसके अलावा, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (EROs) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEOs) जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत मतदाता पंजीकरण और विलोपन (नाम हटाने) के लिए अपनी वैधानिक शक्तियों के अनुसार कार्य करते हैं।

अपनी हालिया परिचालन सफलताओं पर प्रकाश डालते हुए, चुनाव आयोग ने बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में प्रमुख विधानसभा चुनावों के सफल संचालन का उल्लेख किया। प्रेस नोट के अंत में लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, अनुच्छेद 324 के तहत पूर्ण अखंडता के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने की आयोग की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

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