विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय नीति सुधार की मांग: गिरीडीह के युवा सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार ने मांगा आधुनिक पुस्तकालय, सोलर पैनल, मिनी बैंक, वाई-फाई, सीसीटीवी और ग्रुप C/D में 100% स्थानीय नौकरी
गिरीडीह: झारखंड विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही गिरिडीह जिले में खतियान आधारित नियोजन नीति और स्थानीय शासन से जुड़ी नीतियों की मांग तेज हो गई है। बिरनी प्रखंड के केंदुआ गांव के युवा सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार ग्रामीण युवाओं की आवाज बनकर उभरे हैं। उनका कहना है कि राज्य गठन के 24 साल बाद भी दो सबसे बड़ी समस्या पलायन और बेरोजगारी बनी हुई है।
केंदुआ, बिरनी के युवा सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार ने कहा कि गिरिडीह जिला आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां बड़े सरकारी अस्पताल और महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा सुविधा की कमी है, जिसके कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ता है। 24 साल बाद भी यह स्थिति अस्वीकार्य है।
इस विकास के अंतर को पाटने के लिए राजेश कुमार ने प्रशासन और चुनाव लड़ रहे जनप्रतिनिधियों के सामने दस सूत्री मांग पत्र रखा है।
उनकी पहली मांग डिजिटल और शैक्षिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है। उन्होंने हर पंचायत में आधुनिक पुस्तकालय की मांग की है, जिसमें अध्ययन केंद्र, डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर सेंटर हो। उनके अनुसार गरीब परिवारों के छात्र शहर में महंगी कोचिंग नहीं ले सकते, आधुनिक पुस्तकालय से वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। इन केंद्रों में बिजली बाधित न हो, इसके लिए उन्होंने सभी सरकारी भवनों, पंचायत भवनों, स्कूलों और पुस्तकालयों में सोलर पैनल स्थापना की मांग की है। इससे सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कट की समस्या खत्म होगी।
वित्तीय समावेशन के लिए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मिनी बैंक शाखा की मांग की है ताकि ग्रामीणों को बैंकिंग कार्य के लिए 15-20 किलोमीटर दूर न जाना पड़े। इससे किसानों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष लाभ होगा। डिजिटल युग में उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त वाई- फाई सेवा और बाजार. व सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की भी मांग की है।
युवा-केंद्रित बुनियादी ढांचे की कमी पर जोर देते हुए उन्होंने हर पंचायत में खेल मैदान के निर्माण की मांग की है ताकि युवा नशे से दूर रहें और खेल व स्वास्थ्य को बढ़ावा मिले। साथ ही हर पंचायत में 10+2 स्कूल की मांग की है ताकि लड़कियां आठवीं के बाद दूरी के कारण पढ़ाई न छोड़ें।
लेकिन उनकी सबसे महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से अहम मांग रोजगार को लेकर है। राजेश कुमार ने दस सरकारी विभागों में सुधार और समूह ग और घ के 100% पदों पर स्थानीय निवासियों की ही बहाली की मांग की है। उन्होंने खतियान आधारित स्थानीय नीति की वकालत करते हुए कहा कि बाहरी लोग स्थानीय नौकरियां ले जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवा गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में काम करने को मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम युवाओं को अवसर चाहिए। आधुनिक पुस्तकालय और डिजिटल सुविधाओं से शिक्षा मजबूत होगी, सौर पैनल से बिजली की समस्या घटेगी और स्थानीय रोजगार से पलायन रुकेगा। यह सिर्फ मांग नहीं, क्षेत्र के विकास का संकल्प है।”
उन्होंने स्कूलों में सहायक कर्मचारियों की तुरंत बहाली की भी मांग की है, जिसमें पारा-शिक्षक, क्लर्क और चपरासी शामिल हैं, ताकि छात्र-शिक्षक अनुपात और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
राजेश कुमार की मांगें बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और सच्चे प्रतिनिधित्व के लिए एक सामुदायिक मांग को दर्शाती हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण विकास के लिए ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया है, ताकि बेरोजगारी कम हो और शिक्षा, सुरक्षा और डिजिटल सुविधाएं आम जनता तक पहुंचें। उनके इस आंदोलन को अब बिरनी प्रखंड के स्थानीय युवा क्लबों, छात्र संगठनों और किसानों का समर्थन मिल रहा है।