खादगढ़ा बस स्टैंड टेंडर विवाद की जांच के लिए कमेटी गठित, भूूसुर में गरीब परिवारों को हटाने की कार्रवाई पर रोक की मांग
रांची: रांची नगर निगम और जिला प्रशासन के स्तर पर दो बड़े मामले सामने आए हैं। पहले मामले में खादगढ़ा बस स्टैंड की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की खबरों के बाद नगर आयुक्त ने एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। वहीं दूसरे मामले में रांची की महापौर (मेयर) रोशनी खलखो ने भूूसुर इलाके में गरीब परिवारों को हटाए जाने की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
1. खादगढ़ा बस स्टैंड टेंडर विवाद: 5 सदस्यों की कमेटी करेगी जांच
रांची नगर निगम के नगर आयुक्त ने खादगढ़ा बस स्टैंड के टेंडर को लेकर अखबारों में छपी खबरों पर कड़ा संज्ञान लिया है। खबरों में दावा किया गया था कि 7.5 करोड़ रुपये की बोली लगते ही टेंडर रद्द कर दिया गया और बाद में सिर्फ 3.2 करोड़ रुपये में ही बंदोबस्ती कर दी गई।
इस मामले में माननीय महापौर द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर आयुक्त ने 07 सितंबर 2026 को एक कार्यालय आदेश जारी किया है। इसके तहत 5 सदस्यों की एक जांच कमेटी बनाई गई है, जिसमें ये अधिकारी शामिल हैं:
* श्री संजय कुमार (अपर नगर आयुक्त)
* श्री संजीव कुमार (कार्यपालक अभियंता)
* श्रीमती निहारिका तिर्की (सहायक नगर आयुक्त)
* श्री मुकेश रंजन (सहायक नगर आयुक्त)
* श्री राजेश कुमार (प्रोग्रामर)
यह कमेटी खादगढ़ा बस स्टैंड की टेंडर प्रक्रिया के सभी तथ्यों की जांच करेगी और टेंडर संचालित करने वाली एजेंसी MSTC से भी स्पष्टीकरण मांगेगी। जब तक इस कमेटी की जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। इस दौरान बस स्टैंड से टैक्स वसूली का काम नगर निगम खुद अपने स्तर (विभागीय वसूली) पर करेगा।
2. मौजा-भूसूर में झुग्गियां हटाने का विरोध: महापौर ने उपायुक्त को लिखा पत्र
दूसरे बड़े घटनाक्रम में रांची की मेयर रोशनी खलखो ने रांची के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) को 16 सितंबर 2026 को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने मौजा-भूसूर DPS स्कूल से बिरसा चौक जाने वाले मुख्य मार्ग के किनारे बसे गरीब परिवारों की बस्ती को हटाने की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है।
महापौर ने पत्र में मुख्य बातें उठाई हैं:
* 40 से 50 वर्षों से रह रहे लोग: इस मार्ग के दोनों ओर गरीब परिवार पिछले कई दशकों से रह रहे हैं।
* बरसात में बेघर होने का खतरा: इस वर्षा ऋतु में अचानक बस्ती हटाने से छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
* पुनर्वास की मांग: मेयर ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने को कहा है। उन्होंने मांग की है कि जब तक इन परिवारों को रहने के लिए वैकल्पिक आवास (पुनर्वास) नहीं दिया जाता, तब तक इन्हें न हटाया जाए। साथ ही वहां तुरंत पीने का पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जाएं।