राँची: झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (JSFC Ltd) द्वारा जारी किए गए एक बड़े मैनपावर आउटसोर्सिंग टेंडर को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सर्वेश कुमार सिंह ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को एक आधिकारिक शिकायत भेजकर टेंडर में घोर अनियमितता, पक्षपात और कार्टेल (गुटबंदी) बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह विवाद जेम बिड संख्या GEM/2026/B/7754150 से जुड़ा है, जो 24 जुलाई 2026 को प्रकाशित की गई थी। लगभग ₹44.45 करोड़ के अनुमानित मूल्य वाले इस तीन वर्षीय अनुबंध के तहत 699 मानव बल की सेवाएँ ली जानी हैं। कार्यकर्ता का आरोप है कि इस निविदा के तकनीकी और वित्तीय नियमों में जानबूझकर ऐसी हेरफेर की गई है जिससे केवल दो पसंदीदा बड़ी कंपनियों को ही सीधा फायदा पहुँचाया जा सके और पारदर्शी प्रतियोगिता को खत्म किया जा सके।
शिकायत के अनुसार, निगम ने इससे पहले जुलाई 2021, दिसंबर 2025 और जून 2026 में भी इस टेंडर को निकाला था। लेकिन हर बार बिना किसी ठोस कारण के पुरानी निविदाओं को रद्द कर दिया गया और बार-बार नियमों को बदलकर अंततः अत्यधिक कड़ी और असाधारण शर्तें जोड़ दी गईं। नए अपनाए गए QCBS (गुणवत्ता सह लागत आधारित चयन) नियमों के तहत, तकनीकी रूप से पास होने और वित्तीय भाग में शामिल होने के लिए न्यूनतम 80% अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है।
सर्वेश कुमार सिंह ने रेखांकित किया कि कुल 100 अंकों में से 85 अंक इस तरह से बांटे गए हैं जो केवल चहेती बड़ी कंपनियों के पक्ष में सुरक्षित दिखते हैं। इसमें ₹35 करोड़ या उससे अधिक के एकल कार्यानुभव के लिए 15 अंक, ₹35 करोड़ से अधिक के टर्नओवर के लिए 15 अंक, ₹15 करोड़ से अधिक नेटवर्थ के लिए 15 अंक, 3000 से अधिक कर्मियों के एकल ईपीएफ चालान के लिए 15 अंक और प्रस्तुतिकरण (प्रेजेंटेशन) के लिए मनमाने ढंग से 20 अंक तय किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, यह टेंडर झारखंड वस्तु एवं सेवा खरीद नियमावली और MSME नीतियों का सीधा उल्लंघन करता है, जो स्थानीय लघु उद्योगों (MSEs) को तकनीकी शर्तों में छूट देने का प्रावधान करती हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह कदम झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश की भी अवहेलना है जिसमें स्थानीय इकाइयों को वैधानिक छूट देने को कहा गया था। यहाँ तक कि जेम पोर्टल के पारदर्शी ‘रैंडम एल्गोरिदम’ नियम को दरकिनार कर, एल-1 (न्यूनतम दर) टाई होने की स्थिति में सबसे अधिक टर्नओवर वाली कंपनी को काम देने की शर्त जोड़ दी गई है।
बिड बंद होने की अंतिम तिथि 3 अगस्त 2026 है। इसे देखते हुए कार्यकर्ता ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, मुख्यमंत्री और झारखंड के मुख्य सचिव को भी पत्र की प्रतिलिपियाँ भेजी हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से मामले की जांच कराने और इस त्रुटिपूर्ण निविदा को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।