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रांची पहाड़ी मंदिर में वित्तीय घमासान: ऑडिट में गड़बड़ी का खुलासा; ट्रस्ट बोर्ड के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची कमेटी

रांची: रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति (RPMVS) ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड पर वित्तीय अनियमितताओं और “दुर्भावनापूर्ण” कार्रवाई के गंभीर आरोप लगाए हैं।

ऑडिट रिपोर्ट में बेहिसाब लेनदेन का खुलासा
समिति ने हाल ही में उपलब्ध हुई ऑडिट रिपोर्ट के हवाले से बताया कि मंदिर के खातों में कई ऐसे वित्तीय लेनदेन मिले हैं जिनका कोई रसीद, स्पष्ट उद्देश्य या वैध दस्तावेज मौजूद नहीं है। समिति के अनुसार, ये सभी गड़बड़ियां उस अवधि की हैं जब मंदिर का प्रबंधन न्यास बोर्ड द्वारा गठित पिछली कमेटी के हाथों में था।

ऑडिट रिपोर्ट में “ऋण और अग्रिम” (Loans and Advances) की श्रेणी में कई भुगतान दर्ज हैं, जिनका कोई आधार स्पष्ट नहीं है। मुख्य लेनदेन इस प्रकार हैं:

* झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास परिषद: ₹4,00,000
* राकेश सिन्हा: ₹1,90,000
* नेहा साहू: ₹1,80,000
* रिंकू देवी: ₹1,50,000
* आशीष कुमार: ₹1,00,000
* अक्षय कुमार: ₹50,000

समिति ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इनमें से कई प्रविष्टियां पहाड़ी मंदिर समिति के पूर्व सचिव के नाम से जुड़ी हैं, जिसकी गहन जांच की मांग की गई है।

कानूनी लड़ाई और संवैधानिक अधिकार

यह विवाद अब न्यायपालिका की चौखट पर पहुंच गया है। समिति ने जानकारी दी कि उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका (सिविल) संख्या 5123/2026 दायर की है। इस याचिका में न्यास बोर्ड द्वारा जारी हालिया अधिसूचना को “मनमाना” और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई है।

समिति ने कहा, “माननीय उच्च न्यायालय ने पहले भी स्पष्ट किया है कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले वैधानिक प्रक्रिया और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। इसके बावजूद बोर्ड द्वारा नई अधिसूचना जारी करना कानूनी रूप से गलत है।”

“जबरन कब्जे” के खिलाफ चेतावनी
मामला न्यायालय में विचाराधीन (Sub-judice) होने के कारण, समिति ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी पक्ष मंदिर का प्रभार जबरन लेने या नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करता है, तो समिति और श्रद्धालु इसका “लोकतांत्रिक तरीके” से कड़ा विरोध करेंगे।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील

प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समिति ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि न्यास बोर्ड की विवादित अधिसूचना को तत्काल रद्द किया जाए और मंदिर के वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
वर्तमान में, झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या आप इन ऑडिट निष्कर्षों के आधार पर मुख्यमंत्री को लिखा जाने वाला एक औपचारिक पत्र का प्रारूप देखना चाहेंगे?

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