NCST की तीन दिवसीय सुनवाई संपन्न: 66 में से 15 मामलों का मौके पर समाधान, दोषियों पर FIR के निर्देश
पेंशन और प्रमोशन के रुके हुए मामलों में मिली बड़ी राहत, जमीन कब्जाने वालों पर कसेगा शिकंजा
रांची: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की ओर से सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित तीन दिवसीय विशेष जनसुनवाई बुधवार को संपन्न हो गई। सुनवाई के अंतिम दिन आयोग की सदस्य आशा लकड़ा ने प्रेस वार्ता कर महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि तीन दिनों के भीतर कुल 66 मामलों पर गहन सुनवाई की गई, जिनमें से 15 मामलों का त्वरित निष्पादन कर दिया गया है।
बुधनी देवी को पेंशन और अलका को मिला प्रमोशन
आयोग की सक्रियता का असर धरातल पर दिखने लगा है। आशा लकड़ा ने बताया कि आयोग के पिछले निर्देशों के आलोक में बुधनी देवी को पेंशन मिलना शुरू हो गया है। इसी तरह, पशुपालन विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रही अलका कच्छप को भी प्रोमोशन मिल चुका है। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य आदिवासियों को उनका हक और न्याय दिलाना है।
बुकरु जमीन विवाद: DC-SSP को FIR और वारंट के निर्देश
जमीन से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने रांची के बुकरु (चामा गांव) से संबंधित 06 मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। यहाँ आदिवासियों को डरा-धमकाकर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा और जबरन हस्तांतरण किया गया था। इस मामले में आशा लकड़ा ने रांची डीसी और एसएसपी को निर्देश दिया कि दोषियों के खिलाफ अविलंब FIR दर्ज कर वारंट जारी करें। साथ ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर इसकी रिपोर्ट आयोग को सौंपने को कहा गया है। अधिकांश मामलों में CNT एक्ट के उल्लंघन की पुष्टि हुई है।
हरमू अस्पताल मामले में नक्शा विचलन का खुलासा
राजधानी के वार्ड-26 स्थित हरमू अस्पताल से जुड़े जमीन विवाद पर भी आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में पाया गया कि अस्पताल का निर्माण स्वीकृत नक्शे के विरुद्ध किया गया है। नगर निगम ने G+2 आवासीय भवन का नक्शा पास किया था, लेकिन मौके पर G+3 अस्पताल का संचालन हो रहा है। आयोग ने डीसी को निर्देश दिया है कि संबंधित आदिवासी परिवार की वंशावली की सीओ से जांच कराएं और नक्शा विचलन पर कार्रवाई करें।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर नाराजगी: एम्बुलेंस के लिए NGO से करें MOU
चाईबासा की उस हृदयविदारक घटना पर भी सुनवाई हुई, जहाँ एक आदिवासी परिवार को बच्चे का शव थैले में रखकर 60 किमी दूर ले जाना पड़ा था। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने विभाग को सुझाव दिया कि एम्बुलेंस की कमी दूर करने के लिए एनजीओ के साथ एमओयू (MOU) करें, ताकि सुदूर क्षेत्रों में भी समय पर चिकित्सा वाहन उपलब्ध हो सकें।