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पैतृक संपत्ति विवाद बना सामाजिक समस्या, बुद्धिजीवी मंच ने थाना-अंचल से हस्तक्षेप की मांग की

बिरनी (गिरिडीह): बिरनी प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद तेजी से बढ़ रहा है। विशेषकर केंदुआ, कुंदर, खिजुरी, खटपोंक और बरवारडीह जैसे गांवों में भाई-भाई के बीच जमीन के बंटवारे को लेकर रोजाना झगड़े की खबरें सामने आ रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए बुद्धिजीवी मंच, बिरनी ने प्रशासन से सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की है।

मंच के सदस्यों का कहना है कि पुश्तैनी जमीन का सही कागज पर बंटवारा न होने से ही यह समस्या जन्म ले रही है। बहुत से परिवारों में आज भी पुराने खतियान पर ही जमीन चल रही है। दादा के नाम की जमीन पर पोते खेती कर रहे हैं, लेकिन जमाबंदी पर नाम अभी तक संशोधित नहीं हुआ है। जब परिवार बढ़ता है तो एक ही जमीन पर तीन-तीन हिस्सेदार खड़े हो जाते हैं और फिर शुरू होता है विवाद।

बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष ने बताया कि बिरनी थाना में आने वाले कुल मामलों में से लगभग 60 प्रतिशत मामले सिर्फ जमीन विवाद से जुड़े होते हैं। लोग पहले थाना जाते हैं, वहां से अंचल भेजा जाता है, और अंचल से फिर से थाना। इस दौड़-भाग में गरीब किसान का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। कई बार तो यह विवाद मारपीट और खूनी संघर्ष तक पहुंच जाता है
अनमले हैं जहां पिता ने अपने जीवन काल में जमीन का बंटवारा मुंह-जुबानी कर दिया, लेकिन कागज पर कुछ नहीं हुआ। अब बच्चों के बीच लड़ाई हो रही है कि किसकी जमीन मेन रोड पर है और किसकी अंदर। केंदुआ मेन रोड पर जमीन की कीमत आज 1200 से 2500 रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई है, इसलिए हर कोई मेन रोड की जमीन लेना चाहता है।

बुद्धिजीवी मंच ने इस समस्या के समाधान के लिए तीन प्रमुख सुझाव प्रशासन को दिए हैं। पहला, अंचल अधिकारी, बिरनी को प्रत्येक पंचायत में कैंप लगाकर पैतृक संपत्ति का दाखिल-खारिज और बंटवारा करना चाहिए। दूसरा, थाना स्तर पर जमीन विवाद के लिए एक अलग जनता दरबार हर शनिवार को लगना चाहिए जिसमें सीओ और थाना प्रभारी दोनों बैठें। तीसरा, 1950 से पहले के खतियान का डिजिटाइजेशन करके गांव-गांव में लगाना चाहिए ताकि लोग अपना सही हिस्सेदार समझ सकें।

मंच का कहना है कि अगर समय पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बिरनी जैसे शांत प्रखंड में भी बड़े अपराध बढ़ सकते हैं। जमीन ही यहां के लोगों की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए जमीन का सुरक्षित बंटवारा ही शांति का रास्ता है।

इस मामले में बिरनी के सीओ और थाना प्रभारी ने भी आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस पर संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। बुद्धिजीवी मंच ने सभी ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे अपनी पैतृक संपत्ति का बंटवारा आपसी सहमति से और कागज पर करवा लें, ताकि आने वाली पीढ़ी को कोर्ट-कचहरी का सामना न करना पड़े।

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