आरटीआई क्रांति की महागाथा: राँची से लेकर सुदूर गांवों तक गूंजेगी आनंद किशोर पंडा के जन-आंदोलन की आवाज
Ranchi: राज्य में सूचना के अधिकार (RTI) की बदहाली को सुधारने और इस ऐतिहासिक कानून के 21 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आगामी 12 अक्टूबर 2026 को होने जा रहा जन-जागरूकता अभियान अब एक विराट आंदोलन का रूप ले चुका है। सुप्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता आनंद किशोर पंडा के एक अकेले आह्वान पर पूरे झारखंड से बदलाव की एक मूक लहर उठ खड़ी हुई है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
इस महा-अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली फ्री आरटीआई कार्यशाला (Free RTI Workshop) के लिए राज्य के कोने-कोने से अब तक 146 सजग नागरिकों ने अपना अग्रिम पंजीकरण करा लिया है। यह केवल एक सूची नहीं, बल्कि झारखंड में पारदर्शिता और हक की लड़ाई लड़ने वाले जांबाज सिपाहियों की फौज है।
राजधानी से लेकर सुदूर कोल्हान और संताल तक फैला जाल
आनंद किशोर पंडा के इस आंदोलन को सबसे बड़ा समर्थन राजधानी राँची से मिला है, जहां से अकेले 64 सदस्यों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। वहीं, गिरिडीह के 16, बोकारो के 9 और पूर्वी सिंहभूम के 8 प्रतिनिधियों ने इस मुहिम को औद्योगिक और ग्रामीण इलाकों में फैलाने की कमान संभाली है।
इस सूची में सिर्फ शहरों के नाम नहीं हैं; इसमें खूँटी, सिमडेगा, और पलामू जैसी जगहों से भी 7-7 जांबाज शामिल हुए हैं। वहीं कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, देवघर, दुमका, हजारीबाग, चतरा, लातेहार, रामगढ़, धनबाद, सरायकेला खरसावां, गुमला, गढ़वा और लोहरदगा के सुदूर गांवों और टोलों से आए एक-एक प्रतिनिधि अपने इलाके में सूचना की नई ‘पाठशाला’ और ‘क्लीनिक’ खोलने को तैयार हैं।
उत्सव भी, न्याय की गुहार भी
12 अक्टूबर को यह 147 सदस्य अपने-अपने प्रखंडों, पंचायतों और टोलों में सिर्फ उत्सव नहीं मनाएंगे, बल्कि एक साथ मिलकर सरकारी व्यवस्था को झकझोरेंगे। आरटीआई पाठशालाओं और प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से जहां आम जनता को ताकतवर बनाया जाएगा, वहीं झारखंड में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर एक स्वर में महामहिम राज्यपाल, देश की राष्ट्रपति, और देश व राज्य के मुख्य न्यायाधीशों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
आनंद किशोर पंडा ने पंजीकृत सदस्यों की इस सूची पर हर्ष जताते हुए कहा, “जब तक हमारे राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी खाली रहेगी, तब तक लोकतंत्र की यह खिड़की बंद रहेगी। यह 147 नाम इस बात का प्रमाण हैं कि झारखंड की जनता अब अपने अधिकारों के लिए जाग चुकी है। 12 अक्टूबर को हर टोले में आरटीआई का शंखनाद होगा।”
इस संयुक्त प्रयास ने यह साफ कर दिया है कि 12 अक्टूबर 2026 को झारखंड की धरती पर सूचना के अधिकार का एक नया इतिहास लिखा जाने वाला है।

