रांची : जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। राज्य के सभी 24 जिलों से आए हजारों नौकरी के आकांक्षी छात्र पिछले 11-12 दिनों से सड़कों और खुले आसमान के नीचे डटे हुए हैं। आंदोलन को और धार देने के लिए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के बाद अब सविता कुमारी, राहुल, उमा, हबीबा और रूपेश पाल जैसे कई अन्य छात्र भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। छात्रों का आरोप है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों में पारदर्शिता की भारी कमी थी और रात के अंधेरे में बिना कट-ऑफ जारी किए परिणाम घोषित किए गए।
इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन के बीच छात्रों ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, जिन पर वे पूरी तरह से अड़े हुए हैं। छात्रों की पहली और सबसे बड़ी मांग 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा को तुरंत रद्द करना है। इसके साथ ही, आंदोलनकारी छात्र राज्य सरकार की सीआईडी (CID) जांच को पूरी तरह से खारिज करते हुए इस पूरे परीक्षा घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग कर रहे हैं। उनकी अन्य मांगों में दागी और ब्लैकलिस्टेड परीक्षा एजेंसियों (जैसे TDPL) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, ओएमआर (OMR) शीट में पांचवां ‘नॉन-अटेम्प्टेड’ विकल्प जोड़ना, और एक निश्चित परीक्षा कैलेंडर जारी करना शामिल है।
गंभीर मौसम और प्रशासनिक असहयोग के बावजूद छात्रों का हौसला कम नहीं हुआ है, और वे तिरपाल और प्लास्टिक शीट के सहारे लगातार हो रही भारी बारिश में भी धरना स्थल पर डटे हुए हैं। इस बीच, आंदोलन को दबाने के आरोपों के तहत स्टेडियम की बिजली काट दिए जाने की खबरों ने हेमंत सोरेन सरकार की चौतरफा आलोचना बढ़ा दी है। आंदोलन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक रूप से चलाया जा रहा है, जहां स्थानीय आम नागरिकों, मंदिरों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा स्वेच्छा से प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन, पानी और रसद सामग्री पहुंचाई जा रही है। छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे आने वाले दिनों में झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे।
चौतरफा बढ़ते दबाव और तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बीच, हेमंत सोरेन सरकार ने आखिरकार आंदोलनकारी छात्रों के साथ गतिरोध तोड़ने और बातचीत का रास्ता खोलने की पहली औपचारिक पहल की है। रांची के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADM) कानून-व्यवस्था खुद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और सरकार का वार्ता प्रस्ताव छात्रों के सामने रखा। जिला प्रशासन ने आंदोलनकारियों से अनुरोध किया है कि वे अपना एक 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर मुख्यमंत्री आवास पर सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करें और अपनी मांगें उनके समक्ष रखें।
हालांकि, धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास जाने के इस सरकारी न्योते को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और सीधे संवाद की मांग की है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि मुख्यमंत्री के साथ जो भी बातचीत होगी, वह किसी बंद कमरे में नहीं बल्कि इसी स्टेडियम में सभी छात्रों के सामने लाइव होनी चाहिए। छात्र प्रतिनिधियों ने इस सरकारी प्रस्ताव पर आपस में विचार-विमर्श करने के लिए दो घंटे का समय लिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या छात्र और सरकार के बीच यह बातचीत सफल हो पाती है या फिर रांची में युवाओं का यह आक्रोश एक नए राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का रूप ले लेगा।