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डिजिटल शिक्षा में क्रांति: यूजीसी-एमएमटीटीसी द्वारा कंटेंट ऑथरिंग टूल्स और एआई पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

राँची: यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC) द्वारा ‘सूचना प्रौद्योगिकी में अंतःविषय/बहुविषयक पुनश्चर्या पाठ्यक्रम’ (ऑनलाइन) के तहत एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। “कंटेंट ऑथरिंग टूल्स: डिजिटल शिक्षा के लिए एक उभरती हुई सूचना प्रौद्योगिकी” विषय पर आयोजित इस सत्र में देश भर के शिक्षकों ने भाग लिया। मुख्य वक्ता के रूप में राँची विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार ठाकुर उपस्थित रहे, जबकि इस पूरे पाठ्यक्रम का समन्वय डॉ. अनुभूति श्रीवास्तव द्वारा किया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत शिक्षण में बदलाव

व्याख्यान के दौरान डॉ. आनंद कुमार ठाकुर ने वर्तमान डिजिटल शैक्षिक परिदृश्य में कंटेंट ऑथरिंग टूल्स की बढ़ती उपयोगिता और आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए यह बेहद जरूरी है कि शिक्षक न केवल अपने विषय के विशेषज्ञ हों, बल्कि डिजिटल कंटेंट निर्माता के रूप में भी कुशल हों। इन आधुनिक टूल्स की मदद से शिक्षक ऐसी अध्ययन सामग्री तैयार कर सकते हैं जो आकर्षक, संवादात्मक (interactive), मल्टीमीडिया-आधारित हो और छात्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप हो।”

शिक्षक की जगह नहीं लेगा एआई, बढ़ाएगा क्षमता
इस कार्यक्रम में चैटजीपीटी (ChatGPT), गूगल जेमिनी (Google Gemini), क्लाउड एआई (Claude AI), परप्लेक्सिटी एआई (Perplexity AI) और गूगल नोटबुकएलएम (Google NotebookLM) जैसे आधुनिक जनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म्स के शैक्षिक अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

एआई को लेकर शिक्षकों की आशंकाओं को दूर करते हुए डॉ. ठाकुर ने स्पष्ट किया, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शिक्षकों को रिप्लेस करने (हटाने) के लिए नहीं, बल्कि उनकी शिक्षण क्षमताओं की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए विकसित किया जा रहा है। ये टूल्स शिक्षकों के लिए पाठ योजना (lesson plans), अध्ययन सामग्री, मूल्यांकन प्रश्न, प्रश्न बैंक और अनुसंधान-आधारित शिक्षण संसाधन तैयार करने में अमूल्य साबित हो रहे हैं।”

आधुनिक टूल्स और फ्रेमवर्क का प्रशिक्षण

सत्र के दौरान प्रतिभागियों को पारंपरिक और एआई-सहायता प्राप्त, दोनों तरह की सामग्री निर्माण प्रक्रियाओं से परिचित कराया गया। शिक्षकों को H5P, eXeLearning, Articulate Storyline, Adobe Captivate, iSpring Suite, Canva for Education, Google Slides, Microsoft PowerPoint और Camtasia जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की उपयोगिता के बारे में बताया गया।

पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अनुभूति श्रीवास्तव ने आधुनिक शिक्षा पद्धतियों में इन तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, “आज के शैक्षणिक ढांचे जैसे आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE), ब्लेंडेड लर्निंग, मूक (MOOCs) और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) में कंटेंट ऑथरिंग टूल्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षकों को वैश्विक मानकों के अनुसार खुद को अपडेट रखना होगा।”

यह व्याख्यान शिक्षकों के लिए अत्यधिक उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा। सत्र के अंत में एक प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. ठाकुर ने ई-लर्निंग और एआई-आधारित शिक्षण से जुड़े प्रतिभागियों के सभी सवालों के विस्तृत जवाब दिए और उन्हें समय के अनुकूल डिजिटल कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

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