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त्रिकूट रोपवे हादसे के गुनहगारों को बचा रही है पुलिस, सांसद दीपक प्रकाश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर लगाए गंभीर आरोप

Ranchi: झारखंड के देवघर में हुए दर्दनाक त्रिकूट रोपवे हादसे को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा के राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक तीखा पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस हादसे के मुख्य जिम्मेदार कॉरपोरेट अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है।

मुख्य आरोपी को बचाने का आरोप

दीपक प्रकाश ने अपने पत्र में देवघर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल 2022 को हुए इस हादसे में तीन मासूम लोगों की जान चली गई थी और दर्जनों लोग घंटों हवा में जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे थे। इसके बावजूद, मोहनपुर पुलिस ने इस मामले में बेहद हल्की और जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की।
सांसद ने पुलिस की चार्जशीट (आरोप पत्र) में एक बड़ी गड़बड़ी का खुलासा किया है। चार्जशीट के अनुसार, जांच में साइट मैनेजर विनीत सिन्हा और दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) आदित्य चामरिया, दोनों के खिलाफ आरोप सही पाए गए थे। इसके बावजूद पुलिस ने केवल साइट मैनेजर के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जबकि रसूखदार एमडी आदित्य चामरिया के खिलाफ जांच को जानबूझकर लंबित रख दिया गया।

सरकारी खजाने और जुर्माने की अनदेखी
पत्र में कॉरपोरेट और वित्तीय लापरवाही का मुद्दा भी उठाया गया है। दीपक प्रकाश ने बताया कि झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) ने हादसे के बाद संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) कर दिया था और उस पर 9.11 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार ने अब तक इस भारी-भरकम जुर्माने की वसूली के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

सांसद दीपक प्रकाश की प्रमुख मांगें:

* उच्च स्तरीय जांच: उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की पहचान के लिए उच्च स्तरीय जांच हो, जिन्होंने मुख्य आरोपियों को बचाने या मामले को दबाने का आदेश दिया था।
* एमडी की तुरंत गिरफ्तारी: दामोदर रोपवे कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य चामरिया को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।
* पूरक आरोप पत्र: लंबित जांच को तेजी से पूरा करके पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) दाखिल की जाए।
* जुर्माने की वसूली: कंपनी पर लगाए गए 9.11 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि को तुरंत वसूल किया जाए।

सांसद ने चेतावनी दी है कि जांच में हो रही इस चार साल की देरी से जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि रसूखदार लोगों को प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है, जिससे कानून व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठ रहा है।

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