Ranchi: साहित्य की शाश्वत सुगंध और शब्दों के ओजस्वी स्वर आज जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली के ‘दयानंद प्रेक्षा गृह’ में जीवंत हो उठे। विद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित अंतर्सदनीय अंग्रेजी काव्य पाठ प्रतियोगिता’ में न केवल भाषा की उत्कृष्टता का दर्शन हुआ, बल्कि अंग्रेजी साहित्य की कालजयी कृतियों के प्रति नई पीढ़ी का अनुराग भी प्रस्फुटित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अंग्रेजी कविता के शैक्षिक और संवेदनात्मक महत्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि कविता केवल छंदबद्ध पंक्तियाँ नहीं, बल्कि मानवीय अनुभूतियों का वह वैश्विक सेतु है जो विद्यार्थियों के भाषाई कौशल को परिमार्जित कर उनके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास और कल्पनाशीलता का संचार करता है। ‘दयानंद प्रेक्षा गृह’ की दीवारों ने आज अभिव्यक्ति की उस शक्ति को महसूस किया, जहाँ प्रतिभागियों ने अपनी आवाज़ और भाव-भंगिमाओं से शब्दों को अविस्मरणीय अनुभवों में रूपांतरित कर दिया।
प्रतियोगिता के उज्ज्वल नक्षत्र
प्रतिभा के इस महाकुंभ में विभिन्न सदनों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति से निर्णायक मंडल को अचंभित कर दिया:
सब-जूनियर समूह (कक्षा 6 से 8)
प्रथम स्थान – अन्वी वैभव (टैगोर सदन)
द्वितीय स्थान – अमिताभ कृष्णा (तिलक सदन) एवं अनाबिया एहतेशाम (राजेन्द्र सदन)
तृतीय स्थान – अभरना देबनाथ (तिलक सदन) एवं शानवी बड़ाईक (राजेन्द्र सदन)
जूनियर समूह (कक्षा 9 – 10) –
प्रथम स्थान – अपराजिता बनर्जी (तिलक सदन)
द्वितीय स्थान – अर्पित कुमार एवं अहान सिन्हा (दयानंद सदन)
तृतीय स्थान – ऋद्धिमा खन्ना (तिलक सदन)
मंच पर जब शेक्सपियर के ‘जूलियस सीज़र’ से एंटनी का ओजस्वी भाषण और ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ से शाइलॉक का मर्मस्पर्शी संवाद गूँजा, तो प्रेक्षा गृह तालियों की गड़गड़ाहट से सराबोर हो गया। केन नेस्बिट की ‘Olympic Granny’ की चंचलता, लॉन्गफेलो की ‘Psalm of Life’ की दार्शनिकता, डब्ल्यू. बी. यीट्स की ‘Sailing to Byzantium’ की आध्यात्मिक गहराई और फेलिशिया हेमेंस की ‘Casabianca’ के वीरतापूर्ण पाठ ने कार्यक्रम को एक ऐतिहासिक गरिमा प्रदान की।
निर्णायक मंडल एवं मार्गदर्शन
इस बौद्धिक आयोजन के सफल मूल्यांकन का दायित्व अंग्रेजी विभाग के वरिष्ठ शिक्षक मिताली शर्मा, लिली रॉय, मीनाक्षी झा, स्मिता निधि एवं ग़ज़ल मिश्रा ने बखूबी निभाया।
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री बी. एन. झा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि कविता हमें जीवन को सौंदर्यपरक दृष्टि से देखने की कला सिखाती है।
उप-प्राचार्या श्रीमती अनुपमा श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों के प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला रखते हैं।