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पांडेय गणपत राय के 168वें शहादत दिवस पर रांची में उमड़ा जनसैलाब; गणमान्य व्यक्तियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रांची: 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के महानायक और महान स्वतंत्रता सेनानी पांडेय गणपत राय का 168वां शहादत दिवस आज रांची के शहीद चौक स्थित जिला स्कूल के समीप उनकी प्रतिमा पर बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान की मांग

शहीद की वंशज और उत्तराधिकारी डॉ. वंदना राय ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा कि पाण्डेय गणपत राय की शहादत और जयंती को न केवल राज्य, बल्कि पूरे देश में गौरव के साथ मनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, “देश के प्रत्येक नागरिक को उस सर्वोच्च बलिदान को याद रखना चाहिए जो उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए दिया था।”

अंतिम सांस तक संघर्ष की गाथा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ‘झारखंड अगेंस्ट करप्शन’ के केंद्रीय संगठन सचिव और समाजसेवी नीपू सिंह ने कहा कि आज हम जिस शांति और आजादी की सांस ले रहे हैं, वह पाण्डेय गणपत राय जैसे महापुरुषों की ही देन है। उन्होंने इतिहास को याद दिलाते हुए बताया कि 1857 के विद्रोह के दौरान पाण्डेय गणपत राय ने ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव, शेख भिखारी, नीलांबर-पीतांबर और टिकैत उमराव सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी।

उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने पाण्डेय गणपत राय को लोहरदगा के एक घर से धोखे से पकड़ा था और उन्हें पैदल रांची लाया गया था। 21 अप्रैल, 1858 को जिला स्कूल के गेट के पास एक कदम्ब के पेड़ की टहनी से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी गई थी।

श्रद्धांजलि देने पहुंचे गणमान्य लोग

इस गौरवपूर्ण अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में डॉ. वंदना राय, एडीएम आलोक कुमार, डॉ. राजेश कुमार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव रंजन प्रसाद, आशुतोष त्रिवेदी, नीपू सिंह, मिथिलेश कुमार पांडेय, डॉ. सुभाष साहू, सुबोध गुप्ता, राजेश सिन्हा, सुशील कुमार, नीरज वर्मा, राजू सिंह और डॉ. अजीत सिन्हा सहित हजारों शहरवासी शामिल थे।

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