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रांची की शाम और शराब का मायाजाल: क्या आपकी खुशी सच में जाम के साथ है?

झारखंड की राजधानी रांची, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत आबोहवा के लिए जाना जाता है, आज एक गंभीर समस्या की चपेट में है। शाम ढलते ही यहाँ के मोराबादी मैदान से लेकर कडरू और रातू रोड की गलियों तक, शराब की दुकानों पर उमड़ती भीड़ यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या हमारी खुशियाँ और थकान का इलाज केवल ‘बोतल’ में ही सिमट गया है?

क्षणभर का आनंद, जीवनभर का पछतावा

रांची के युवाओं और कामकाजी वर्ग में शराब का बढ़ता चलन एक फैशन बन गया है। जिसे हम ‘सोशल ड्रिंकिंग’ या ‘तनाव कम करने का जरिया’ कहते हैं, वह धीरे-धीरे एक लाइलाज लत में तब्दील हो सकता है। शराब के सेवन से मिलने वाली वह चंद घंटों की राहत अक्सर स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

आर्थिक और पारिवारिक बिखराव

एक औसत मध्यमवर्गीय परिवार में शराब पर होने वाला खर्च बच्चों की शिक्षा या घर की बेहतर सुख-सुविधाओं में कटौती कर सकता है। शराब का अत्यधिक सेवन न केवल व्यक्ति को प्रभावित करता है, बल्कि उस पत्नी की उम्मीदों और बच्चों के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है जो घर के दरवाजे पर अपने पिता के होश में आने का इंतजार करते हैं।

रांची की बदलती तस्वीर में आपका योगदान

हमारा शहर ‘स्मार्ट सिटी’ बनने की राह पर है। क्या एक स्मार्ट शहर के नागरिक नशे की गिरफ्त में होने चाहिए? कल्पना कीजिए उस सुबह की, जहाँ आप बिना सिरदर्द और बिना किसी ग्लानि के जागते हैं। वह पैसा जो आप शराब पर खर्च कर रहे हैं, अगर उसे हुंडरू या जोन्हा फॉल की सैर पर या परिवार के साथ अच्छे रेस्टोरेंट में खर्च किया जाए, तो वह खुशी स्थायी होगी।

छोड़ने का संकल्प आज ही क्यों?

अक्सर लोग कहते हैं कि “कल से छोड़ दूंगा”। लेकिन वह कल कभी नहीं आता। शराब छोड़ने का मतलब है—अपनी सेहत को एक और मौका देना, अपने बच्चों की नजरों में फिर से सम्मान पाना और समाज में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में पहचान बनाना।
रांची में कई नशामुक्ति केंद्र और स्वयंसेवी संस्थाएं आपकी मदद के लिए तैयार हैं। यदि आप खुद को इस दलदल से बाहर निकालना चाहते हैं, तो संकोच न करें। अपने परिवार से बात करें, डॉक्टर से सलाह लें और सबसे महत्वपूर्ण—अपनी इच्छाशक्ति को जगाएं।

निष्कर्ष

शराब की बोतल में कैद आनंद अक्सर हानिकारक हो सकता है। आज रांची के हर जागरूक नागरिक को यह संकल्प लेने की जरूरत है कि वे नशे की इस लत को त्याग कर एक स्वस्थ और समृद्ध झारखंड के निर्माण में सहयोग देंगे। याद रखिये, आपकी असली ताकत जाम के गिलास में नहीं, बल्कि आपके संयम और स्वस्थ शरीर में है।

आज ही फैसला लें—शराब को नहीं, जिंदगी को चुनें

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